छात्रों से ज्यादा तो पंक्चर वाले जंतर मंतर पर थे
अपने ऐसे ही बयानों से चर्चा में रहते हैं
पंक्चर बनाने वालों से इशारा साफ था
मोदी की माफी वाले बयान के बाद टिप्पणी
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और दक्षिणी दिल्ली के पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी एक बार फिर अपने बयानों के कारण विवादों के घेरे में हैं। रविवार को तुगलकाबाद में आयोजित जेन जेड समिट को संबोधित करते हुए बिधूड़ी ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों पर बेहद विवादास्पद टिप्पणी की है। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के नाम पर छात्रों के भविष्य की चिंता करने के बजाय, वहां एक खास वर्ग के लोगों का जमावड़ा था। बिधूड़ी ने तंज कसते हुए कहा कि उस प्रदर्शन में वास्तव में छात्रों से कहीं अधिक संख्या उन लोगों की थी जो पंचर बनाने और ताला बनाने का काम करते हैं।
बिधूड़ी का यह बयान नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवाओं के आंदोलन को सीधे तौर पर राजनीतिक रंग देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान उन प्रदर्शनकारियों की कड़ी आलोचना की, जिन्होंने विरोध के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार के प्रति अपमानजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। बिधूड़ी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की अभद्र शब्दावली का उपयोग लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन की गरिमा के खिलाफ है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
दिलचस्प बात यह है कि बिधूड़ी की यह तीखी टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस हालिया रुख के ठीक बाद आई है, जिसमें उन्होंने देश के युवाओं से संयम बरतने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से उन युवा प्रदर्शनकारियों को माफ करने की अपील की थी, जिन्होंने उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अशोभनीय शब्दों का प्रयोग किया था। प्रधानमंत्री का यह बयान जहां उनकी उदारता और युवाओं के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर रमेश बिधूड़ी का कड़ा रुख भाजपा के भीतर की उस सख्त विचारधारा को उजागर करता है जो पार्टी विरोधी तत्वों या राजनीतिक विरोधियों को बख्शने के मूड में नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिधूड़ी का यह बयान आने वाले दिनों में नई राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है। विपक्षी दल जहां इसे युवाओं की आवाज दबाने और वर्ग विशेष को निशाना बनाने की कोशिश बता रहे हैं, वहीं बिधूड़ी के समर्थकों का कहना है कि वे केवल उस मर्यादा की रक्षा कर रहे हैं जिसका उल्लंघन प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करके किया गया था। इस मामले ने एक बार फिर नीट जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक टकराव के केंद्र में ला खड़ा किया है।