लोकसभा में एंटी-पेपर लीक विधेयक पास
नरेंद्र मोदी ने किया था इसका एलान
इसमें सजा को और कठोर बनाया गया है
प्रश्न पत्र लीक को रोकने की दिशा में प्रयास
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने और अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए लोकसभा ने बुधवार को ध्वनिमत से एंटी-पेपर लीक विधेयक को पारित कर दिया। इस नए और कड़े कानून का मुख्य उद्देश्य देशभर में आयोजित होने वाली विभिन्न परीक्षाओं में संगठित अपराध, प्रश्नपत्र लीक और धांधली की घटनाओं पर पूरी तरह से नकेल कसना है।
सदन में प्रस्तुत किए गए विधेयक के विवरण के अनुसार, यह नया कानून पुराने प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाता है। सरकार ने इसमें शामिल दोषियों और माफियाओं के खिलाफ वित्तीय जुर्माने और जेल की अवधि—दोनों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी की है। नए प्रावधानों के तहत यदि कोई संगठित गिरोह पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी कराने में लिप्त पाया जाता है, तो उस पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि को 1 करोड़ रुपये से सीधे 10 गुना बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, इस श्रेणी में सजा की अवधि को भी 5-7 साल से बढ़ाकर 7 से 10 साल तक का कड़ा कारावास कर दिया गया है।
कानून में केवल व्यक्तियों ही नहीं, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली या उसमें मदद करने वाली संस्थाओं के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का खाका खींचा गया है। यदि कोई एजेंसी या संस्था दोषी पाई जाती है, तो उसके प्रतिबंधित (ब्लैकलिस्ट) होने की अवधि को 4 साल से बढ़ाकर 8 साल कर दिया गया है। साथ ही, व्यक्तिगत स्तर या छोटे समूहों द्वारा की जाने वाली धांधली के मामलों में जुर्माने की रकम को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ तय किया गया है।
हाल के वर्षों में नीट, यूजीसी-एनईटी और कई राज्यस्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की लगातार घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य और कड़ी मेहनत पर पानी फेर दिया था। सरकार का मानना है कि यह कड़ा विधेयक एक मजबूत निवारक के रूप में काम करेगा। इससे न केवल व्यक्तिगत स्तर पर नकल करने वालों में डर पैदा होगा, बल्कि पेपर लीक जैसे धंधे में शामिल बड़े संगठित सिंडिकेट भी पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएंगे।
लोकसभा से पारित होने के बाद अब इस विधेयक को आगामी दिनों में चर्चा और स्वीकृति के लिए राज्यसभा में पेश किया जाएगा। संसद के दोनों सदनों से हरी झंडी मिलने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक देश में कानून के रूप में लागू हो जाएगा, जो पुराने और कमजोर नियमों का स्थान लेगा।