टीएमसी के बागी सांसदों को टीएमसी लिखने पर नया तंज
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अलग सीट आवंटित हो चुका है
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पार्टी का फैसला अब तक नहीं हुआ
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अब भी टीएमसी के नाम से ही दर्ज हैं
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः तृणमूल कांग्रेस छोड़कर अनजाना एनसीपीआई में शामिल हुए बागी सांसदों की सीट आवंटन और उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। लोकसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में इस नए गुट को आमंत्रित किया गया था। इसके साथ ही, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की हालिया अहम बैठक में भी इस गुट के सांसदों को औपचारिक रूप से बुलाया गया, जहाँ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन बागी सांसदों से काफी देर तक अलग से बातचीत की।
हालाँकि, इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बावजूद कागजी और तकनीकी रूप से एनसीपीआई में शामिल हुए ये सभी 20 बागी सांसद अभी भी लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधि ही माने जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि टीएमसी से अलग होकर एनसीपीआई में उनके पूर्ण विलय की याचिका पर लोकसभा अध्यक्ष ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। यही वजह है कि जब भी ये सांसद सदन में अपना वक्तव्य देते हैं या संसद टीवी पर दिखाई देते हैं, तो उनकी पार्टी का नाम ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ही लिखा हुआ आता है।
सदन के इसी तकनीकी पहलू को लेकर कृष्णनगर से टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी छोड़कर गए इन बागी सांसदों पर कड़ा और तीखा हमला बोला है। मंगलवार को जब बर्धमान पूर्व की सांसद शर्मिला सरकार—जो एनसीपीआई में शामिल होने वाले बागी सांसदों की सूची में शामिल हैं—लोकसभा में भाषण दे रही थीं, तब संसद टीवी की स्क्रीन पर उन्हें टीएमसी प्रतिनिधि के रूप में ही दिखाया जा रहा था।
महुआ मोइत्रा ने संसद टीवी के उस दृश्य का स्क्रीनशॉट अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा करते हुए बेहद आक्रामक अंदाज में लिखा, इतनी बेशर्म बेवफाई के बाद भी ये धोखेबाज तृणमूल कांग्रेस की पहचान से पीछा नहीं छुड़ा पाए! जब तक किसी अमान्यता प्राप्त राजनीतिक दल में आपका बहुचर्चित विलय आधिकारिक रूप से पूरा नहीं हो जाता, तब तक कम से कम टीवी स्क्रीन पर अपनी पहचान बीजेपी की बी-टीम के रूप में ही दे दीजिए!
गौरतलब है कि एनडीए की बैठक में बुलावा मिलने के बाद से ही ये बागी सांसद खुद को टीएमसी से पूरी तरह अलग और स्वतंत्र गुट के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन महुआ मोइत्रा के इस तंज और कड़े प्रहार ने इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर गरमा दिया है। अब देखना यह होगा कि लोकसभा अध्यक्ष इन सांसदों की सदस्यता और विलय पर अंतिम फैसला कब तक लेते हैं।