Breaking News in Hindi

टोक्यो पर भूकंप के महा-संकट को देखते हुए बैकअप राजधानी बनाने की तैयारी में जापान, अधिसूचना जारी

टोक्यो (जापान): जापान की सरकार राजधानी टोक्यो पर मंडरा रहे विनाशकारी भूकंप के गंभीर खतरे को देखते हुए देश की एक दूसरी (बैकअप) राजधानी विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

इस महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रधानमंत्री सना तकाएची की सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है। जापान सरकार का कहना है कि देश के सुरक्षित भविष्य और आपातकालीन स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह दूरगामी फैसला लिया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1868 में टोक्यो को आधिकारिक रूप से जापान की राजधानी के रूप में मान्यता दी गई थी।

⚠️ ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट: प्रस्ताव को मिली हरी झंडी, लेकिन विपक्ष ने जताया कड़ा ऐतराज

प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान सरकार ने दूसरी राजधानी की खोज और चयन से संबंधित व्यापक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है।

हालांकि, इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को लेकर जापान के राजनीतिक गलियारों में नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि इस फैसले का सीधा राजनीतिक लाभ सत्ताधारी गठबंधन की सहयोगी ‘जापान इनोवेशन पार्टी’ को मिलेगा।

🌋 नई बैकअप राजधानी बनाने के पीछे हैं ये 3 प्रमुख और बड़े कारण

  1. 70% तक है शक्तिशाली भूकंप की आशंका: ब्लूमबर्ग ने जापानी सरकार के हवाले से बताया है कि अगले 30 वर्षों के भीतर राजधानी टोक्यो 7 या उससे अधिक तीव्र रिक्टर स्केल वाले शक्तिशाली भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी आशंका 70 प्रतिशत से भी अधिक है। टोक्यो के नीचे एक्टिव फॉल्ट लाइन्स (Fault Lines) मौजूद हैं और इसके आसपास पेसिफिक प्लेट, फिलिपीन प्लेट, यूरेशियन प्लेट तथा नॉर्थ अमेरिकन प्लेट—ये 4 प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं।

  2. आर्थिक और आबादी का भारी दबाव: रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में जापान की अधिकांश सूचीबद्ध (Listed) दिग्गज कंपनियों के मुख्यालय अकेले टोक्यो में ही स्थित हैं। इसके अलावा जापान की कुल आबादी का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा टोक्यो में ही निवास करता है और देश में सर्वाधिक रोजगार के अवसर भी यहीं केंद्रित हैं।

  3. 2010 से चल रही थी योजना, बैकअप के रूप में करेगी काम: जापान सरकार काफी लंबे समय से इसकी तैयारी कर रही थी और 2010 में पहली बार इस अवधारणा के बारे में सार्वजनिक रूप से बताया गया था। सरकार का स्पष्ट कहना है कि जो नई राजधानी विकसित की जाएगी, वह प्राथमिक रूप से एक आपातकालीन बैकअप के तौर पर काम करेगी। यदि भविष्य में टोक्यो में कोई प्राकृतिक आपदा या भीषण हादसा होता है, तो वहां से देश की पूरी सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित किया जा सकेगा।

🏙️ ओसाका समेत ये 4 शहर रेस में सबसे आगे, चयन के लिए तय की गई हैं 4 सख्त शर्तें

जापान सरकार की पहली प्राथमिकता ऐतिहासिक शहर ओसाका (Osaka) को नई बैकअप राजधानी के रूप में तैयार करने की है, जो पर्यटन और व्यापार के दृष्टिकोण से बेहद अहम है।

ओसाका के अलावा मियागी (Miyagi), होक्काइडो (Hokkaido) और फुकुओका (Fukuoka) भी इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि नई राजधानी के रूप में केवल उन्हीं शहरों के नाम पर विचार किया जाएगा, जो निम्नलिखित 4 मुख्य अहर्ताओं (Eligibility Criteria) को पूरा करते हों:

  1. पर्याप्त सरकारी एवं प्रशासनिक अवसंरचना (Infrastructure)

  2. मजबूत आर्थिक स्तर (Economic Level)

  3. संतुलित जनसंख्या का आकार (Population Size)

  4. उच्च प्रशासनिक क्षमता (Administrative Capacity)