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देश में लगातार बढ़ रही मौत की सजा का आंकड़ा

ईरान के आंतरिक प्रशासन पर एमनेस्टी इंटरनेशनल की चिंता

जेनेवाः अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक विस्तृत रिपोर्ट जारी कर ईरान सरकार द्वारा नागरिक विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में मृत्युदंड के तीव्र और अत्यधिक इस्तेमाल पर गहरी चिंता और आक्रोश जताया है। यह रिपोर्ट ईरान प्रशासन द्वारा पिछले 24 घंटों में दो और युवा प्रदर्शनकारियों को सार्वजनिक रूप से फांसी दिए जाने के तुरंत बाद आई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इन फांसी की सजाओं को अंतर्राष्ट्रीय न्याय मानकों का खुला उल्लंघन और नागरिकों में भय पैदा करने की एक क्रूर राज्य-प्रायोजित रणनीति करार दिया है।

संगठन का आरोप है कि जिन व्यक्तियों को सजा-ए-मौत दी गई, उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार नहीं दिया गया। अदालत में उन्हें अपने वकील चुनने की अनुमति नहीं थी और उनके बयान कथित तौर पर मानसिक व शारीरिक यातनाओं के जरिए जबरन दर्ज कराए गए थे। एमनेस्टी की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वर्ष में ही ईरान में फांसी दिए जाने वाले लोगों की संख्या चिंताजनक स्तर तक बढ़ चुकी है, जिनमें कई राजनीतिक बंदी, अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं। संगठन ने कहा कि ईरान सरकार देश में आर्थिक मंदी और सामाजिक स्वतंत्रता की कमी के खिलाफ उठने वाली आवाज़ों को दबाने के लिए मौत की सजा का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में कर रही है।

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और यूरोपीय संघ ने भी ईरान के कड़े रवैये की तीव्र निंदा की है। कई यूरोपीय देशों ने ईरान के राजदूतों को तलब कर मौत की सजा पर तत्काल रोक लगाने की माँग की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे ईरान पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ाएँ ताकि न्यायिक हत्याओं के इस सिलसिले को रोका जा सके। वैश्विक स्तर पर उठ रही इस आवाज़ के बावजूद, ईरान के न्यायपालिका विभाग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है।