Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में वर्चस्व की लड़ाई तेज, असली संगठन बताने को लेकर आमने-सामने आए दोनों गुट LADC नीति के विरोध में गर्माया वकीलों का आंदोलन, 27 जुलाई को लुधियाना कोर्ट परिसर में 89 अधिवक्ता बै... महिला इंस्पेक्टर से दुष्कर्म के आरोपी SI साहिबमीत सिंह पर बड़ा खुलासा, दादा और पिता भी रह चुके हैं प... मानसा में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से गैंगरेप, परिजनों की शिकायत पर 5 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज बरनाला लाठीचार्ज के विरोध में 27 जुलाई को 'पंजाब बंद' का ऐलान, जालंधर में वाल्मीकि समाज का बड़ा फैसल... श्री माता वैष्णो देवी यात्रा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, जयकारों के साथ भवन की ओर बढ़े भक्त पंजाब में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल जारी, बिजली मंत्री के साथ 6 घंटे की मीटिंग रही पूरी तरह बेनतीज... मालिक की फोटो लगाकर 2.50 करोड़ की साइबर ठगी, लुधियाना पुलिस ने जोधपुर से आरोपी को किया गिरफ्तार लुधियाना के फेस-5 फोकल पॉइंट में अज्ञात युवक का शव मिलने से फैली सनसनी, मौके पर पहुंची पुलिस लुधियाना के 100 फुटी रोड पर युवक पर जानलेवा हमला, बातचीत के बहाने बुलाकर तेजधार हथियारों से किया लहू...

लद्दाख की गुफा से मिला प्राचीन मानव अंश

इंसान  के क्रमिक विकास में एक और नई कड़ी जुड़ी

  • आधा तिब्बती और आधा उत्तर भारतीय

  • चर्चित गुफा के अंदर मिले यह अवशेष

  • करीब पांच सौ वर्ष से अधिक पुराने

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः लद्दाख के एक दूरस्थ गांव से करीब 4,000 मीटर (13,000 फीट) से अधिक की ऊंचाई पर स्थित ओल्ड लेडी स्पाइडर केव में वैज्ञानिकों को सदियों पुराने मानव अवशेष मिले हैं। डीएनएन और पेलियोजीनोमिक अध्ययनों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये प्राचीन अवशेष एक ऐसे विलुप्त मानव समूह के हैं, जिनका आनुवंशिक डीएनए आधे तिब्बती और आधे उत्तर भारतीय/दक्षिण एशियाई पूर्वजों का एक दुर्लभ और अनोखा मिश्रण था।

वैज्ञानिक अनुसंधान और कार्बन डेटिंग के अनुसार, ये अवशेष लगभग 500 से 600 वर्ष पुराने (15वीं-16वीं शताब्दी सीई) हैं। उस दौर में उच्च-हिमालयी व्यापारिक मार्गों और अंतर-सांस्कृतिक संबंधों के कारण लद्दाख दक्षिण एशिया, तिब्बत और मध्य एशिया के बीच एक प्रमुख चौराहा बना हुआ था। यहाँ पाए गए प्राचीन मानवों में तिब्बती पठार के निवासियों, उत्तर भारत-पाकिस्तान के मैदानी इलाकों और स्टेपी (मध्य एशियाई) जनजातियों का आनुवंशिक अंश पाया गया है।

वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह विशिष्ट आनुवंशिक मिश्रण आज के जीवित लोगों में लगभग गायब क्यों हो गया है? प्राचीन काल में जब लोग व्यापार और पशुपालन के सिलसिले में इस कठिन इलाके में पहुंचे, तो वहां विभिन्न समुदायों के बीच विवाह और आनुवंशिक मेलजोल हुआ। हालांकि, बाद की शताब्दियों में भौगोलिक अलगाव, कठोर जलवायु परिस्थिति, राजनीतिक बदलावों या स्थानीय तिब्बती-लद्दाखी आबादी में बड़े पैमाने पर हुए आनुवंशिक विलय के कारण यह विशिष्ट पूर्वज समूह समय के साथ विलुप्त हो गया या मुख्यधारा की आबादी में पूरी तरह से विलीन हो गया।यह पुरातात्विक खोज साबित करती है कि ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र केवल एक दुर्गम पहाड़ी इलाका नहीं था, बल्कि हजारों सालों से दक्षिण एशिया और मध्य एशिया को जोड़ने वाली एक जीवंत और गतिशील प्रयोगशाला रहा है।