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अडानी समूह ने एयरलाइन शुरू करने की मांगी अनुमति

एयरपोर्ट का संचालन पहले से लेने के बाद अब दूसरी कार्रवाई

  • केंद्र सरकार के पास आवेदन दिया है

  • हिस्सेदारी में छूट पर रोक हटायें

  • केंद्रीय कैबिनेट ही यह फैसला लेगी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: देश के विमानन क्षेत्र में एक नए और बड़े बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। सरकारी सूत्रों और कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, अडानी समूह ने केंद्र सरकार से एक महत्वपूर्ण नागरिक उड्डयन नियम में छूट देने का औपचारिक अनुरोध किया है। वर्तमान में लागू नियमों के अनुसार, देश के सबसे व्यस्त और प्रमुख हवाई अड्डों—नई दिल्ली और मुंबई—के संचालकों या उनके सहयोगियों को किसी भी अनुसूचित कमर्शियल एयरलाइन में 10 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखने की अनुमति नहीं है।

यदि सरकार इस नियम में अडानी समूह को छूट प्रदान कर देती है, तो ऊर्जा, पोर्ट्स और रक्षा जैसे विविध क्षेत्रों में फैले इस विशाल व्यापारिक समूह के लिए भारत में अपनी खुद की एयरलाइन शुरू करने और विमानन क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाने का रास्ता साफ हो जाएगा। गौरतलब है कि वर्तमान में अडानी समूह देश के आठ प्रमुख हवाई अड्डों का सफल संचालन कर रहा है। इसके अलावा, समूह की पायलट प्रशिक्षण, विमान रखरखाव व मरम्मत (MRO) और ग्राउंड हैंडलिंग जैसे उड्डयन से जुड़े सहायक क्षेत्रों में पहले से ही बहुत मजबूत पकड़ है। वर्तमान स्वामित्व ढांचे के तहत मुंबई हवाई अड्डे में अडानी समूह की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि दिल्ली हवाई अड्डे का 74 प्रतिशत स्वामित्व जीएमआर एयरपोर्ट्स के पास है।

सूत्रों के मुताबिक, नागरिक उड्डयन मंत्रालय वर्ष 2006 में इन हवाई अड्डों के निजीकरण के समय अनुबंध में शामिल की गई इस शर्त को पिछली तारीख (रेट्रोस्पेक्टिव) से संशोधित करने की कानूनी वैधता पर देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कानूनी राय मांग रहा है। यदि सॉलिसिटर जनरल की ओर से हरी झंडी मिलती है, तो अनुबंध में इस तरह के किसी भी नीतिगत संशोधन के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की अंतिम मंजूरी की आवश्यकता होगी।

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि केंद्र सरकार भारतीय विमानन बाजार में इंडिगो और एयर इंडिया के बढ़ते दबदबे को संतुलित करने के पक्ष में हो सकती है। वर्तमान में ये दोनों एयरलाइंस मिलकर घरेलू बाजार के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से पर एकतरफा नियंत्रण रखती हैं। प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और यात्रियों को बेहतर विकल्प देने के लिए सरकार एक मजबूत वित्तीय पृष्ठभूमि वाले नए एयरलाइन ऑपरेटर के प्रवेश को सकारात्मक रूप में देख सकती है।

हालाँकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि पिछले साल दिसंबर में समूह के चेयरमैन गौतम अडानी के बेटे जीत अडानी ने किसी भी एयरलाइन व्यवसाय में सीधे प्रवेश करने की योजनाओं को सार्वजनिक रूप से खारिज किया था। ऐसे में नियम में बदलाव की मांग के बाद समूह की भावी रणनीतियों को लेकर बाजार में उत्सुकता बढ़ गई है।