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बिना वर्दी के लाठीधारी यानी गोपनीयता अथवा जवाबदेही

तीन दिनों से जारी विवाद के बीच दिल्ली पुलिस का नया फरमान

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: सोमवार को हुए उग्र विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आए कुछ दृश्यों और तस्वीरों ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीरों और वीडियो फुटेज में कुछ लोग साधारण नागरिक कपड़ों (शर्ट, पैंट और चप्पल) में पुलिस हेलमेट पहने हुए भीड़ को नियंत्रित करते और प्रदर्शनकारियों पर लाठियाँ भांजते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही जनता और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि ये व्यक्ति कौन थे, इन्हें बल प्रयोग करने का अधिकार किसने दिया और कानून-व्यवस्था संभालने के दौरान ये बिना आधिकारिक वर्दी तथा नेम-टैग के क्यों तैनात थे?

इस आक्रोश के बीच, सोशल मीडिया पर ऐसे कुछ पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर उनके आवासीय पते, इंस्टाग्राम हैंडल और फोन नंबर सार्वजनिक रूप से लीक कर दिए गए। हालांकि, इस इंटरनेट अभियान में गंभीर गलतियाँ भी सामने आईं, जहाँ कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने गलत व्यक्तियों को चिन्हित कर दिया। एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर व्यापक रूप से साझा किए गए एक कटे-छँटे वीडियो में एक पुलिसकर्मी की पहचान हनी डागर के रूप में की गई, जिससे यह बहस और तेज़ हो गई कि क्या कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी पर बिना वर्दी वाले कर्मियों को तैनात किया जाना सही है या नहीं।

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए, सेवारत और सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आधुनिक पुलिसिंग की व्यावहारिक वास्तविकताओं का हवाला दिया है। अधिकारियों का तर्क है कि पुलिस विभाग नियमित रूप से विशेष पहचान इकाइयों और खुफिया विंग का संचालन करते हैं, जिनका मुख्य काम भीड़ के बीच छिपे असामाजिक तत्वों पर नज़र रखना और गुप्त रूप से काम करना होता है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि खुफिया जानकारी जुटाना एक अलग विषय है, लेकिन नागरिक कपड़ों में सीधे तौर पर लाठीचार्ज या बल प्रयोग करना पारदर्शिता और पुलिस की जवाबदेही को गंभीर रूप से कटघरे में खड़ा करता है।