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तेहरान में ब्रिटेन का दूतावास अब लगभग बंद हुआ

सरकार ने अपने कर्मचारियों को वापस बुलाया

एजेंसियां

तेहरानः अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के 12वें दिन भी जारी भीषण हवाई हमलों के बीच यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) ने ईरान से अपने सभी शेष राजनयिक कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुला लिया है। ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी एक बयान में कहा, सुरक्षा के बिगड़ते हालातों को देखते हुए यूके के कर्मचारियों को ईरान से अस्थायी रूप से हटा लिया गया है।

तेहरान स्थित हमारा दूतावास फिलहाल दूरस्थ रूप से अपना काम करना जारी रखेगा। कार्यालय ने अपने नागरिकों को ईरान की सभी यात्राओं से बचने की सलाह देते हुए आगाह किया है कि ब्रिटिश और दोहरी नागरिकता (ब्रिटिश-ईरानी) वाले नागरिकों को वहाँ गिरफ्तारी, पूछताछ या हिरासत में लिए जाने का गंभीर खतरा है। इससे पहले, फरवरी में अमरीका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य अभियानों की शुरुआत से ठीक पहले भी ब्रिटेन ने इसी प्रकार का कदम उठाया था।

अमरीकी सेंट्रल कमांड ने बुधवार देर रात जारी बयान में बताया कि लगातार 12वीं रात किए गए इन लक्षित हवाई हमलों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले नागरिक नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों को खतरे में डालने की ईरान की सैन्य क्षमता को और कम करना है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमरीकी मिसाइलों ने पश्चिमी ईरान के अहवाज़, रामशीर और अंदिमेश्क शहरों के आसपास के सैन्य ठिकानों पर सीधे सटीक निशाने साधे। इसी दौरान, कुवैती सेनो ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ईरानी आक्रामकता के बाद देश की सीमा में घुस रहे शत्रुतापूर्ण ड्रोनों का मुकाबला कर रही है।

तनाव को और बढ़ाते हुए अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ी चेतावनी दी थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा निशाना बनाए गए प्रत्येक समुद्री जहाज के बदले ईरान के एक पुल या बिजली संयंत्र को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। इसके जवाब में, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ईरान भी अमरीका की हर सैन्य कार्रवाई का जवाब ईंट का जवाब पत्थर से देने की नीति पर कायम रहेगा।