Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
EVM में टोटलाइजर से क्यों नहीं हो सकती वोटों की गिनती?: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मां... किशनगंज: खकवा नदी के तेज बहाव में तैरकर जनाजा ले जाने की मजबूरी, ग्रामीणों ने डीएम और बिहार सरकार से... शिवपुरी में रहस्यमयी बीमारी का कहर: 10 दिनों में एक ही परिवार के 4 बच्चों की मौत, डेंगू-मलेरिया निगे... भारतीय मुसलमानों के अधिकारों के लिए 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का गठन: नई दिल्ली में ऐलान अफगानिस्तान टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान: श्रेयस अय्यर बने कप्तान, युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी... 'सैयारा' फेम अनीत पड्डा की नई सीरीज 'हुंकार: द रोर' का टीजर रिलीज: जानें कहानी, स्टार कास्ट और OTT र... नेपाल में 180 km/h की रफ्तार से आई 'हिमालयी सुनामी': रसुवा-धाडिंग में भारी तबाही, सुरंगों में बचाव क... LIC के दो नए धमाकेदार प्लान: गारंटीड सेविंग्स के साथ मिलेगा प्योर लाइफ कवर, 7 सितंबर से शुरू होगी बि... UPI का नया रिकॉर्ड: अगस्त में ₹29.82 लाख करोड़ का लेनदेन, कुल 2,451 करोड़ ट्रांजेक्शन दर्ज; NPCI ने ... श्रीकृष्ण के सबसे प्रिय भोग माखन-मिश्री और पंचामृत की विधि; जानें मलाई से शुद्ध माखन बनाने का आसान न...

आज डींग हांक रहे धर्मेंद्र प्रधान का पूर्व इतिहास बाहर निकला

पेपर लीक का विरोध कर बने थे बड़े छात्र नेता

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः वर्ष 1997 का दौर था और जानकी वल्लभ पटनायक के नेतृत्व में ओडिशा में कांग्रेस की सरकार चल रही थी। भुबनेश्वर में मुख्यमंत्री के निजी आवास से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर राज्य सचिवालय के बाहर लगभग 1,500 छात्र परीक्षा पत्र लीक के विरोध में सड़कों पर उतर आए थे। इस उग्र छात्र आंदोलन के बीच एक प्रमुख चेहरा, जो आज भारत के केंद्रीय शिक्षा मंत्री हैं, वह धर्मेंद्र प्रधान थे।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान ने जानकी पटनायक सरकार के खिलाफ इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक सक्रिय छात्र नेता के रूप में किया था। प्रधान के निकट सहयोगियों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि उन्होंने 18 वर्ष की आयु में ही छात्र राजनीति में कदम रख दिया था और एबीवीपी के भीतर एक कुशल और प्रभावकारी संगठक के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान में परास्नातक की पढ़ाई की और नवंबर 1994 से 1997 के बीच दो बार संगठन के राष्ट्रीय सचिव का पद संभाला।

वर्ष 1997 में ओडिशा में कथित प्रश्नपत्र लीक के बाद भारी राजनीतिक भूचाल आ गया था। उस समय राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य कर रहे प्रधान भारतीय जनता पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल होने की तैयारी में थे। उत्कल विश्वविद्यालय में प्रधान के जूनियर रहे और वर्तमान में भुबनेश्वर के आरएमडी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रशांत राउत ने उस ऐतिहासिक प्रदर्शन को याद करते हुए बताया कि लगभग 1,500 छात्रों ने सचिवालय के सामने ओडिशा सरकार के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था। हालांकि, पुलिस की बर्बर कार्रवाई ने स्थिति को हिंसक बना दिया। राउत के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनकी हड्डियां भी टूट गई थीं।

छात्र राजनीति के इन्हीं संघर्षों ने भाजपा के भीतर धर्मेंद्र प्रधान के दीर्घकालिक सांगठनिक करियर की नींव रखी। ओडिशा में भाजपा के संगठनात्मक नेटवर्क के विस्तार में प्रधान का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिसके परिणामस्वरूप 2024 में भाजपा ने ओडिशा में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल के 24 साल पुराने शासन को समाप्त कर अपनी पहली सरकार बनाई।

विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट तर्क दिया है कि परीक्षा में हुई इस भारी गड़बड़ी पर निष्पक्ष चर्चा तभी संभव है, जब शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा दें। यह स्थिति इसलिए भी बेहद प्रासंगिक हो गई है क्योंकि जिस पेपर लीक के खिलाफ संघर्ष करके कभी धर्मेंद्र प्रधान राजनीति के शीर्ष तक पहुंचे थे, आज वही मुद्दा उनके सामने एक बड़ी चुनौती बन खड़ा हुआ है।