सुनेत्रा पवार और बेटा पार्थ विरोध में खड़े
राष्ट्रीय खबर
मुंबईः महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गुटों के संभावित विलय को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ताकत बढ़ाने के लिए अजीत पवार गुट वाली राकांपा और शरद पवार गुट की राकांपा के विलय की इच्छुक है। वर्तमान में, राकांपा (सुनेत्रा गुट) एनडीए का हिस्सा है, जबकि राकांपा (शरदचंद्र पवार) विपक्ष के इंडिया ब्लॉक में शामिल है।
हालांकि, इस संभावित विलय का राकांपा अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके बड़े बेटे व राज्यसभा सांसद पार्थ पवार खुलकर विरोध कर रहे हैं। सुनेत्रा पवार के एक करीबी सहयोगी ने खुलासा किया है कि माँ-बेटे की यह जोड़ी किसी भी कीमत पर विलय के पक्ष में नहीं है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि राकांपा के प्रमुख शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले दोबारा पार्टी पर अपना नियंत्रण हासिल कर सकें। इसके विपरीत, राकांपा के कुछ वरिष्ठ नेता पार्टी के अधिकांश विधायकों का समर्थन जुटाकर विलय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं।
इस राजनीतिक रस्साकशी के बीच बैठकों का दौर जारी है। गुरुवार शाम पार्थ पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इससे पहले मंगलवार रात, राकांपा के जयंत पाटिल ने फडणवीस के आधिकारिक आवास पर मुलाकात की थी, जहां प्रतिद्वंदी राकांपा गुट के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी मौजूद थे। इसके अलावा, राकांपा नेता जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी मुंबई में मुलाकात की।
सूत्रों के अनुसार, पार्थ पवार ने मुख्यमंत्री फडणवीस से हुई बैठक में यह जानने की कोशिश की कि शरद पवार गुट के नेताओं और उनके बीच क्या बातचीत हुई है, लेकिन फडणवीस ने इस पर कोई भी विवरण साझा करने से इनकार कर दिया और कहा कि वे इस विषय पर सीधे सुनेत्रा पवार से बात करेंगे। सहयोगी ने बताया कि यदि विलय अपरिहार्य (अनिवार्य) हो जाता है, तो सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार यह शर्त रख सकते हैं कि सुनेत्रा पवार ही पार्टी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री दोनों पदों पर बनी रहें।
भाजपा नेतृत्व दोनों गुटों को मतभेद भुलाकर एकजुट करने के प्रयास में इसलिए जुटा है ताकि संसद में महिला आरक्षण को लागू करने और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए एनडीए को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत मिल सके। दोनों गुटों को एक साथ लाने के लिए भाजपा ने दोनों पक्षों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह देने की पेशकश भी की है।