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एसआईआर डेटा का अन्यत्र उपयोग नहीः सुप्रीम कोर्ट

चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार को खास हिदायत

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का संबंध केवल और केवल चुनावों से है। कोर्ट की यह टिप्पणी उस याचिका के बाद आई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार एसआईआर डेटा का उपयोग खाद्य सुरक्षा, महिला कल्याण और पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं से लोगों के नाम काटने के लिए कर रही है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ के सदस्य, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बिहार एसआईआर मामले में अपने 27 मई के फैसले में साफ कर दिया था कि एसआईआर के नतीजों का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता, और नागरिकता का निर्णायक रूप से निर्धारण करने के लिए तो बिल्कुल भी नहीं। जस्टिस बागची ने टिप्पणी की, चुनाव आयोग का यह कर्तव्य है कि वह नागरिकता अधिनियम के तहत निर्णय के लिए मामले को सरकार के पास भेजे… जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक अन्य सभी उद्देश्यों के लिए नागरिकता की स्थिति यथावत रहनी चाहिए। चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 9, 10, 11 और 12 (नागरिकता अधिकारों से संबंधित) के मामलों में कोई संवैधानिक प्राधिकरण नहीं है।

अदालत ने यह नोटिस पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की एसआईआर समिति के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोस द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत निर्वाचन आयोग, पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को जारी किया है। याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और अधिवक्ता नेहा राठी ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण लोगों को मतदान के अधिकार से परे गंभीर नागरिक परिणामों का सामना करना पड़ रहा है।

अधिवक्ता शंकरनारायणन ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मई और जून में जारी तीन आदेशों की ओर ध्यान आकर्षित कराया। याचिका के अनुसार, 19 मई की अधिसूचना में कहा गया कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, उन्हें महिलाओं के लिए नकद हस्तांतरण की अन्नपूर्णा योजना का लाभ तब तक नहीं मिलेगा जब तक वे एसआईआर ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील नहीं करते। 4 जून को राज्य ने एसआईआर के आधार पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) यानी राशन कार्ड के लाभार्थियों के नाम हटाने का निर्देश दिया। इसके अलावा, 14 मई को एक आदेश जारी कर एसआईआर सूची से हटाए गए नामों के जाति प्रमाण पत्रों की पुन: जांच करने और उन्हें रद्द करने को कहा गया।

कौंसल ने अदालत को बताया कि राज्य के 19 ट्रिब्यूनल में कुल 34 लाख अपीलें दायर की गई हैं, जिनमें से अब तक केवल 38,000 अपीलों का ही निपटारा हो सका है। चिंताजनक बात यह है कि निपटाई गई अपीलों में से 70% लोगों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने की मंजूरी मिल गई है, जिससे साफ है कि बड़ी संख्या में वैध नागरिकों के नाम गलत तरीके से हटाए गए। कोर्ट से अपील प्रक्रिया को पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध बनाने की मांग की गई है।