केंद्र ने अपनी तरफ से सुधार के पांच प्रस्ताव दिये हैं
स्वचालित चालान मिलान इसमें शामिल
कागजी कार्रवाई को कम करने का प्रयास
लागू करने पर सभी को समय भी मिलेगा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार 8 अक्टूबर को होने वाली आगामी जीएसटी परिषद की बैठक में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में अगले दौर के सुधारों के लिए पांच सूत्री योजना पेश करेगी। इन सुधारों का उद्देश्य जीएसटी प्रणाली में वर्तमान प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना और खासकर छोटे व्यवसायों के लिए अनुपालन के बोझ को कम करना है। यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट सहित कर दरों को इस एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है।
यह पांच सूत्री प्रस्ताव प्रक्रियागत सुधारों, संरचनात्मक सुधारों, जीवन और व्यापार को आसान बनाने, सेवा निर्यात और ई-कॉमर्स को कवर करता है। प्रस्तावित प्रमुख बदलावों में खरीदारों और विक्रेताओं के बीच स्वचालित चालान मिलान, इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने से जुड़े कागजी काम को कम करना, छोटे करदाताओं द्वारा रिटर्न दाखिल करने की आवृत्ति घटाना और पूरे देश में बिक्री करने के इच्छुक छोटे व्यवसायों के लिए बहु-राज्य पंजीकरण को समाप्त करना शामिल है। इन प्रस्तावों पर जीएसटी परिषद की बैठक में चर्चा की जाएगी और यदि इन्हें मंजूरी मिलती है, तो व्यवसायों को नई प्रणालियों के अनुकूल होने का समय देने के लिए इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
प्रक्रियाओं का सरलीकरण वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में 61% जीएसटी करदाताओं को कर अधिकारी के हस्तक्षेप के बिना तीन कार्य दिवसों के भीतर जीएसटी पंजीकरण मिल जाता है। अब केंद्र अनावश्यक पूछताछ और अस्वीकृति से बचने के लिए शेष करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने का प्रस्ताव रखेगा। इसके अलावा, केंद्र चालान प्रबंधन प्रणाली के उन्नयन का प्रस्ताव करेगा ताकि विक्रेता द्वारा चालान में किए गए सुधार स्वचालित रूप से खरीदार के चालान में दिखाई दें।
क्रेडिट और रिफंड अनुपालन वर्तमान में व्यवसाय शिकायत करते हैं कि उनके आपूर्तिकर्ता द्वारा रिटर्न दाखिल न करने के कारण उनका इनपुट टैक्स क्रेडिट अक्सर रुक जाता है। केंद्र इस मुद्दे को हल करने का प्रयास कर रहा है।
अधिकारी ने कहा कि जिस खरीदार के पास चालान है, जिसने सामान प्राप्त कर लिया है और कर सहित अपने आपूर्तिकर्ता को पूरा भुगतान कर दिया है, उसे अपना क्रेडिट मिलना चाहिए। इसके अलावा, केंद्र सामान्य व्यावसायिक लागतों और इनपुट सेवाओं पर भुगतान किए गए करों को आईटीसी प्रणाली के दायरे में लाने का प्रस्ताव कर रहा है। रिफंड को 10 दिनों के भीतर स्वीकार करने और सीमा शुल्क विभाग तथा बैंकिंग प्रणाली से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जोखिम जांच करके 90% रिफंड राशि जारी करने का भी प्रस्ताव है।
कम कागजी कार्रवाई और लागत केंद्र राज्यों के साथ एक नोट साझा करेगा जिसमें केवल उपभोक्ताओं को आपूर्ति करने वाले छोटे करदाताओं को महीने में एक बार के बजाय साल में एक बार रिटर्न दाखिल करने की अनुमति दी जाएगी। सेवा प्रदाताओं की एक अन्य प्रमुख मांग निर्यात के दायरे को व्यापक बनाने की है। केंद्र इस बात का संशोधन करने का प्रस्ताव कर रहा है कि विदेशों में शाखा के माध्यम से विदेशी ग्राहक को दी जाने वाली सेवा को भी सेवा निर्यात माना जाए। इसके अलावा, छोटे व्यवसायों के लिए कागजी कार्रवाई को काफी कम करने के लिए, केंद्र यह प्रस्ताव देगा कि विक्रेताओं को अपने गृह राज्य में एक बार पंजीकरण कराने के बाद पूरे देश में बेचने की अनुमति दी जाए।