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बुलेट ट्रेन परियोजना पर जापान के पूर्व मंत्री के बयान का खंडन

भारत ने इस बयान की तुरंत आलोचना की है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में कथित देरी को लेकर जापान के एक पूर्व मंत्री द्वारा भारतीय मंत्रियों और अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों से एक नया राजनयिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने गत 15 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारतीय पक्ष पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया। माकिहारा का दावा है कि भारतीय अधिकारियों ने बातचीत के दौरान बार-बार अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान नहीं किया और शिंकानसेन  परियोजना की वार्ताओं में निहित स्वार्थों को आगे बढ़ाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत के इस फ्लैगशिप हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की प्रगति में आ रही बाधाएं पूरी तरह से भारतीय पक्ष की वजह से हैं।

हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और कार्य योजना के अनुसार चल रहा है। योजना के मुताबिक, भारत के इस पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के पहले हिस्से का चरणबद्ध यात्री परिचालन 15 अगस्त 2027 से शुरू होने की उम्मीद है। यह बुलेट ट्रेन परियोजना जापानी शिंकानसेन तकनीक पर आधारित है और इसे जापान सरकार की एजेंसी जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी द्वारा आंशिक रूप से वित्तपोषित किया जा रहा है।

पूर्व मंत्री माकिहारा ने यह तीखी प्रतिक्रिया टोक्यो स्थित एक बिजनेस न्यूज पोर्टल पर छपे ओपिनियन पीस के जवाब में दी थी। यह लेख दिल्ली में मेट्रो वाहन सलाहकार और वरिष्ठ जापानी रेलवे इंजीनियर इसाओ त्सुजिमुरा द्वारा लिखा गया था। त्सुजिमुरा ने अपने लेख में तर्क दिया था कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मूल जापानी शिंकानसेन मॉडल से काफी भटक गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय अधिकारी निजी तौर पर यह अच्छी तरह जानते थे कि 2023 तक इस परियोजना का संचालन शुरू करने का लक्ष्य पूरी तरह से अवास्तविक। माकिहारा के इस पोस्ट के सार्वजनिक होने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुरंत कदम उठाते हुए इन दावों को मनगढ़ंत बताया है, ताकि दोनों देशों के बीच चल रहे इस बड़े रणनीतिक सहयोग पर कोई आंच न आए।