कार्बन डाईअक्साइड सोखने में दोहरी भूमिका
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विकास बंद होने के बाद भी काम जारी
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ओक के पेड़ों पर हुआ है यह अनुसंधान
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पुरानी वैज्ञानिक सोच के विपरीत नतीजा
राष्ट्रीय खबर
रांचीः प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका साइंस एडवांसेज में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, यह बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है कि पेड़ तब तक बढ़ते रहें जब तक वे प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है कि ओक (बलूत) के पेड़ अपने वार्षिक विकास (सालाना शारीरिक वृद्धि) के समाप्त होने के काफी समय बाद भी वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड सोखना जारी रखते हैं। यह अभूतपूर्व खोज यह संकेत देती है कि हमारे मौजूदा वैश्विक जलवायु मॉडल के अनुमानों की तुलना में वन अपनी लकड़ियों में काफी कम कार्बन जमा कर पाते हैं।
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यह खोज विज्ञान जगत की उस पुरानी और स्थापित धारणा को सीधी चुनौती देती है, जिसके तहत माना जाता था कि प्रकाश संश्लेषण की उच्च दर से स्वाभाविक रूप से पेड़ों का शारीरिक विकास भी अधिक होता है। यदि पेड़ लगातार कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण कर रहे हैं, लेकिन उस कार्बन का उपयोग नए तने या लकड़ी के निर्माण में नहीं कर रहे हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि दीर्घकालिक रूप से वातावरण से कम कार्बन ही स्थायी रूप से लॉक रह पाएगा।
जलवायु परिवर्तन की गति को धीमा करने में दुनिया भर के जंगलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि पेड़ वायुमंडल से हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड को हटाते हैं और इसके एक बड़े हिस्से को अपने तनों, शाखाओं और गहरी जड़ों में संचित करते हैं। अब तक वैज्ञानिकों को सामान्यतः यह उम्मीद थी कि वायुमंडल में बढ़ता सीओ 2 का स्तर प्रकाश संश्लेषण को बढ़ावा देगा, जिससे पेड़ तेजी से बढ़ेंगे और दीर्घकालिक कार्बन भंडारण में वृद्धि होगी।
हालांकि, नए निष्कर्ष बताते हैं कि यह संबंध कहीं अधिक जटिल है। पेड़ अतिरिक्त कार्बन को अवशोषित करना जारी रख सकते हैं, लेकिन उसका अधिकांश भाग नई लकड़ी में परिवर्तित नहीं होता। इसके बजाय, उस कार्बन का उपयोग नई पत्तियां बनाने, अल्पकालिक चयापचय (मेटाबॉलिक) प्रक्रियाओं को ऊर्जा देने, या जड़ों के माध्यम से मिट्टी में छोड़ने जैसे अन्य कार्यों में किया जा सकता है।
कोलंबिया क्लाइमेट स्कूल के लैमोंट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के पर्यावरण-जलवायु वैज्ञानिक और मुख्य शोधकर्ता मुकुंद पालत राव ने बताया, वर्तमान में अधिकांश मॉडल यह मानकर चलते हैं कि यदि प्रकाश संश्लेषण हो रहा है, तो पेड़ का विकास भी होगा। लेकिन हमने पाया कि ऐसा नहीं है। भविष्य में सिर्फ इसलिए कि अधिक प्रकाश संश्लेषण हो रहा है, इसका मतलब यह नहीं लगाया जा सकता कि पेड़ों का विकास भी अधिक होगा।
शोधकर्ताओं ने पूर्वी अमेरिका और कैलिफोर्निया में 137 ओक वन स्थलों के उपग्रह चित्रों, ट्री कैनोपी के सीओ 2 स्तर और तनों पर लगे सेंसरों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। पूर्वी अमेरिका में ओक के पेड़ आमतौर पर मई से जुलाई तक बढ़े, लेकिन अक्टूबर तक प्रकाश संश्लेषण करते रहे। उनके वार्षिक कार्बन अवशोषण का लगभग 36 प्रतिशत हिस्सा विकास रुकने के बाद हुआ। वहीं कैलिफोर्निया में अगस्त तक विकास रुकने के बाद भी प्रकाश संश्लेषण चलता रहा, जो उनके कुल वार्षिक कार्बन अवशोषण का 26 प्रतिशत था। डॉ. राव के अनुसार, इसका सीधा कारण पानी का आंतरिक दबाव है। गर्म और शुष्क मौसम में पेड़ों के भीतर पानी का दबाव तुरंत गिर जाता है, जिससे शारीरिक विकास रुक जाता है, जबकि प्रकाश संश्लेषण धीमी गति से चलता रहता है। यह शोध सचेत करता है कि गर्म होती दुनिया में जंगलों द्वारा कार्बन सोखने की हमारी उम्मीदों पर हमें दोबारा विचार करना होगा।
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