गाजा में मानवीय संकट की परेशानी का समाधान नहीं
एजेंसियां
यरूशलम: संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फिलिस्तीनी चरमपंथी समूह हमास पर गाजा पट्टी में राहत सामग्री के वितरण में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाया है। यूएन का कहना है कि हमास की इन हरकतों के कारण युद्धग्रस्त क्षेत्र में पहले से ही भीषण मानवीय संकट से जूझ रहे आम नागरिकों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं।
फिलिस्तीनी क्षेत्रों के लिए संयुक्त राष्ट्र के मानवीय समन्वयक ने रविवार देर रात जारी एक बयान में बताया कि उत्तरी गाजा में एक खाद्य वितरण केंद्र में सशस्त्र पुरुषों के घुसने और विश्व खाद्य कार्यक्रम के गोदाम में दो ट्रक चालकों पर हमला करने के बाद, राहत कर्मियों को शनिवार को अपना काम रोकना पड़ा था।
मिडिल ईस्ट शांति प्रक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के उप विशेष समन्वयक रमीज अलकबरोव ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा, ये घटनाएं कोई अकेली या छिटपुट घटनाएं नहीं हैं। ये पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं और मानवीय अभियानों को निशाना बनाने, डराने-धमकाने, हिंसा और तस्करी के प्रयासों के एक बेहद खतरनाक पैटर्न को दर्शाती हैं। अलकबरोव ने आगे कहा कि ये हरकतें राहत कर्मियों को गंभीर जोखिम में डाल रही हैं, जीवन रक्षक सहायता की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न कर रही हैं, और ऐसे समय में राहत संगठनों की काम करने की क्षमता को सीमित कर रही हैं जब पूरे गाजा में नागरिक बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
दूसरी ओर, हमास ने सोमवार को इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। हमास के मीडिया कार्यालय ने दावा किया कि पुलिस बल वहां केवल कानून प्रवर्तन अभियान चला रहे थे, क्योंकि उन्हें सहायता पैकेटों के भीतर सिगरेट और मोबाइल फोन के पुर्जों की तस्करी किए जाने की खुफिया रिपोर्ट मिली थी। हमास ने अपने बयान में कहा, जबालिया शरणार्थी शिविर के अबू राशिद क्षेत्र में विश्व खाद्य कार्यक्रम के केंद्र में हुई घटना न तो कोई छापा थी, न ही कोई हमला या मानवीय कार्य में बाधा, जैसा कि झूठा दावा किया जा रहा है।
गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमले के बाद शुरू हुए इस युद्ध को ढाई साल से अधिक का समय हो चुका है और गाजा का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुका है। इजरायल की विनाशकारी बमबारी और जमीनी कार्रवाई के कारण गाजा की लगभग 20 लाख की पूरी आबादी विस्थापित हो चुकी है, जो अब तटीय पट्टी के संकीर्ण इलाकों में तंबू या क्षतिग्रस्त इमारतों में रहने को मजबूर है। वर्तमान में इजरायली सेना गाजा के सभी प्रवेश मार्गों सहित 60 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र पर नियंत्रण रखती है, जबकि युद्धविराम की वार्ताएं महीनों से अधर में लटकी हुई हैं।