Breaking News in Hindi

एनसीपी का आंतरिक मतभेद उजागर हो गया

चंद दिनों की चुप्पी के बाद अंततः सच्चाई सामने आ गयी

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रहा असंतोष सोमवार को सार्वजनिक रूप से तब सामने आ गया, जब पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्वाचन को कानूनी चुनौती दे दी। इसी के साथ, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने भी संगठन की कार्यप्रणाली में सुधारात्मक कदम उठाने की वकालत की है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के कुछ महीनों बाद हुए इन दोनों घटनाक्रमों ने पार्टी के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल और राष्ट्रीय महासचिव व चुनाव नोडल अधिकारी बृजमोहन श्रीवास्तव को एक कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुनेत्रा पवार के चुनाव को अवैध और अमान्य घोषित करने की मांग की गई है।

यह कानूनी विवाद ऐसे समय में खड़ा हुआ है जब अजीत पवार के निधन के बाद से पार्टी का एक धड़ा बेहद असहज महसूस कर रहा है। कुछ नेता दबी जुबान में संगठनात्मक मामलों में राज्यसभा सांसद पार्थ पवार के बढ़ते हस्तक्षेप पर चिंता जता रहे हैं। सोमवार को प्रफुल्ल पटेल ने भी माना कि अजीत पवार के जाने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भरना बेहद कठिन है और पार्टी को जल्द ही सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।

गत 9 जुलाई को भेजे गए कानूनी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि 26 फरवरी को मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में सुनेत्रा पवार को अध्यक्ष चुनते समय एनसीपी के संविधान का उल्लंघन किया गया। सच्चिदानंद सिंह के अनुसार, अजीत पवार के निधन के बाद 17 फरवरी को हुई बैठक में प्रफुल्ल पटेल को अंतरिम अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अगले ही दिन तय नियमों को ताक पर रखकर नए अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

झारखंड एनसीपी के प्रमुख सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव के लिए न तो स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण का गठन किया गया और न ही कोई अधिसूचना जारी की गई। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर इन फैसलों को वापस लेकर नए सिरे से पारदर्शी चुनाव नहीं कराए गए, तो वे चुनाव आयोग और अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।