आधे से अधिक एनडीए समर्थक इसके खिलाफ
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः एक हालिया सी-वोटर सर्वे के अनुसार, सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के आधे से अधिक समर्थक अपने वाहनों में ई 20पेट्रोल का उपयोग नहीं करना चाहते हैं। सर्वे में शामिल कई लोगों को डर है कि इस ईंधन से उनके वाहनों को नुकसान हो सकता है और माइलेज भी कम हो सकता है। इन निष्कर्षों से पता चलता है कि सरकार की इथेनॉल सम्मिश्रण नीति को लेकर खुद सत्तापक्ष के मतदाताओं के बीच भी वाहनों के परफॉर्मेंस की चिंताएं नीति के समर्थन पर भारी पड़ रही हैं।
सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, 52.5 प्रतिशत एनडीए मतदाताओं ने कहा कि वे अपने वाहनों में ई 20 पेट्रोल का उपयोग करना पसंद नहीं करेंगे, जबकि केवल 18.1 प्रतिशत ने इसका समर्थन किया। वहीं 29.5 प्रतिशत लोग इस पर कोई राय नहीं बना पाए। विपक्षी दलों के समर्थकों में यह विरोध और भी कड़ा था, जहां 57.9 प्रतिशत लोगों ने ई 20 पेट्रोल न चुनने की बात कही। अन्य दलों के 55 प्रतिशत मतदाताओं ने भी इस ईंधन को खारिज कर दिया। कुल मिलाकर, 55.1 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने ई 20पेट्रोल के इस्तेमाल के प्रति असहमति जताई, जबकि महज 17.1 प्रतिशत ने इसका पक्ष लिया।
यह सर्वे केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा ई 20 पेट्रोल रोलआउट के आलोचकों को दी गई उस चुनौती के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने इथेनॉल-मिश्रित ईंधन से प्रभावित किसी एक भी व्यक्ति को सामने लाने को कहा था। प्रदर्शनकारियों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि वे एक नहीं बल्कि छह ऐसे लोगों को पेश करेंगे जिनके वाहनों को ई 20पेट्रोल से नुकसान हुआ है।
वास्तव में, केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाना अनिवार्य करने के फैसले की चौतरफा आलोचना हो रही है। जहां सरकार विशेषज्ञों का हवाला देकर इसे सुरक्षित बता रही है, वहीं वाहन मालिकों का दावा है कि यह ईंधन माइलेज कम करता है और विशेष रूप से ई 10 पेट्रोल के लिए डिजाइन किए गए पुराने वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचाता है। सर्वे में यह भी सामने आया कि 52.8 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ई 20से माइलेज घटता है, जबकि 54.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं को डर है कि इससे गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं।