अब होमगार्ड को कोई शंटिंग पोस्टिंग नहीं कहेगा
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पांच वर्षों तक लगातार सेवारत रही
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गृहरक्षा और अग्निशमन को नई दिशा
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बल को संगठनात्मक मजबूती देने में सफल
दीपक नौरंगी
पटनाः बिहार गृह रक्षा वाहिनी (होमगार्ड) एवं अग्निशमन सेवा की महानिदेशक (डीजी) शोभा ओहटकर सेवानिवृत्त हो गईं। उनके पांच वर्षों के लंबे कार्यकाल को प्रशासनिक हलकों में बड़े बदलाव, कड़े अनुशासन और संस्थागत सुधारों के दौर के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। अपने विदाई समारोह में भावुक होते हुए उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि आज के बाद कोई भी होमगार्ड विभाग को शंटिंग पोस्टिंग नहीं कहेगा। उनका यह बयान विभाग को एक नया मुकाम देने के उनके प्रयासों को पूरी तरह परिभाषित करता है।

जनवरी 2021 में जब उन्होंने कार्यभार संभाला था, तब विभाग संसाधनों की कमी और सीमित प्रशिक्षण जैसी कई संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रहा था। उन्होंने आते ही सबसे पहले प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाया और जवानों में अनुशासन फूंककर एक परिणाम-आधारित कार्यसंस्कृति की नींव रखी। उनके कुशल नेतृत्व का ही नतीजा था कि चुनावी ड्यूटी, कानून-व्यवस्था और अन्य संवेदनशील मोर्चों पर होमगार्ड जवानों की भूमिका पहले से कहीं अधिक प्रभावी, समयबद्ध और संगठित नजर आई।
अग्निशमन सेवा में भी उन्होंने त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया, जिससे विभाग की कार्यक्षमता में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिला। उनके कार्यकाल की एक और बड़ी उपलब्धि होमगार्ड संगठन को नई ऊर्जा देना रही, जिसके तहत बड़े पैमाने पर पारदर्शी नामांकन प्रक्रिया पूरी कर हजारों नए जवानों का चयन, प्रशिक्षण और तैनाती सुनिश्चित की गई।
शोभा ओहटकर के इन प्रयासों को खुद मुख्यमंत्री ने भी सराहा। उन्होंने विदाई समारोह में याद किया कि मुख्यमंत्री ने विभाग की तैयारियों को देखकर कहा था कि होमगार्ड जवानों को पैरामिलिट्री बलों के समान दक्ष बनाने का ऐतिहासिक कार्य किया गया है, जिसे उन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया। सेवानिवृत्ति के अवसर पर उन्होंने बिहार के युवाओं से पुलिस और वर्दीधारी सेवाओं में आने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। अपने सेवा जीवन के अंतिम दिन किसी औपचारिक कार्यालय में रहने के बजाय उन्होंने अपने जवानों के बीच समय बिताना पसंद किया, जिनसे उनका एक पारिवारिक रिश्ता बन चुका था।
शोभा ओहटकर की विदाई केवल एक आईपीएस अधिकारी की सेवानिवृत्ति नहीं, बल्कि उस विज़नरी नेतृत्व को सलाम है जिसने साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति से किसी भी विभाग की तकदीर बदली जा सकती है। अब उनके उत्तराधिकारी पर इस समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।