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राहुल के निर्देश के बाद भी पंजाब कांग्रेस का संकट कायम

चन्नी ने की वॉरिंग को हटाने की मांग

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में चल रहा अंदरूनी नेतृत्व संकट और गहरा गया है। राज्य में जारी गुटबाजी को शांत करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने शनिवार को पार्टी नेताओं के साथ एक अहम बैठक की। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर के मौजूदा सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के गुट के हावी रहने के कारण यह गतिरोध सुलझने के बजाय और बढ़ गया है।

फरवरी 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुई यह बैठक पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वॉरिंग को पद से हटाने के लिए एक शक्ति प्रदर्शन में बदल गई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में मौजूद कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रभारी भूपेश बघेल के सामने स्पष्ट कर दिया कि वे राजा वॉरिंग के नेतृत्व में काम नहीं करेंगे। दिलचस्प बात यह रही कि खुद प्रदेश अध्यक्ष राजा वॉरिंग इस बैठक में मौजूद नहीं थे।

चन्नी और वॉरिंग कैंप के बीच बढ़ते मतभेदों को सुलझाने के लिए बघेल के हफ्ते भर लंबे चंडीगढ़ दौरे का समापन कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हुआ। करीब 80 मिनट तक चली इस बैठक में वर्तमान और पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों और 2022 के विधानसभा चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों सहित 80 से अधिक कांग्रेस नेता शामिल हुए। बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार, चन्नी ने सभी से हाथ उठाकर राजा वॉरिंग को हटाने के पक्ष में सहमति देने को कहा, जिस पर अधिकांश नेताओं ने हाथ उठाए।

बैठक में चन्नी और राणा गुरजीत के अलावा विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी और दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह सिद्धू सहित कई बड़े चेहरों ने अपनी बात रखी। चन्नी ने बघेल के सामने आरोप लगाया कि राजा वॉरिंग यह अफवाह फैलाकर उनका चरित्र हनन  कर रहे हैं कि वे भाजपा के संपर्क में हैं।

चन्नी ने कहा, मुझ पर भाजपा की केंद्र सरकार और आप की पंजाब सरकार, दोनों ने मामले दर्ज किए हैं, मैं उनसे नहीं डरता। मैंने कभी किसी पद की मांग नहीं की, मेरी केवल एक ही मांग है कि वॉरिंग को अध्यक्ष पद से हटाया जाए। गुरदासपुर के विधायक बरिंदरमीत सिंह पाह्रा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर राजा वॉरिंग अपने पद पर बने रहते हैं, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह सिद्धू ने आरोप लगाया कि वॉरिंग उनके मानसा क्षेत्र में उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि वे खुद चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं, लेकिन वे नहीं चाहते कि वहां कांग्रेस कमजोर हो।