राम मंदिर विवाद पर भाजपा को चैन नहीं दे रहे हैं सपा प्रमुख
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सभी को फोन डिटेल निकाला जाए
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कौन किसके संपर्क में था स्पष्ट हो
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भाजपा सिर्फ राजनीतिक लाभ देखती है
राष्ट्रीय खबर
लखनऊः अयोध्या में राम मंदिर में दान में कथित हेराफेरी को लेकर राजनीतिक तूफान गुरुवार को और तेज हो गया। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों की गहरी जांच की मांग की और मंदिर के कर्मचारियों तथा भारतीय जनता पार्टी के बीच संबंधों का आरोप लगाया। संवाददाताओं से बात करते हुए, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में काम करने वाले सभी लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनमें से 99.9 प्रतिशत लोगों के संबंध भाजपा से थे। उन्होंने कहा कि ऐसा खुलासा सत्ताधारी दल के भीतर खलबली मचा देगा।
यादव की यह टिप्पणी राम मंदिर में चढ़ावे और दान में मिली नकदी के गबन के आरोपों की चल रही विशेष जांच दल की जांच के बीच आई है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अब हर घर में चर्चा का विषय बन गया है और भाजपा पर राजनीतिक हितों को धार्मिक भावनाओं पर हावी होने देने का आरोप लगाया।
मंदिर के मामलों की देखरेख करने वालों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए यादव ने कहा, जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई थी वे कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं, जबकि जिन्हें जिम्मेदारी दी गई है वे सवालों का सामना कर रहे हैं। भाजपा पर निशाना साधते हुए यादव ने आरोप लगाया कि पार्टी चुनावी जरूरतों के मुताबिक अपना रुख बदलती है। उन्होंने भाजपा पर धार्मिक मूल्यों के बजाय पैसे और राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के सनातन धर्म के अनुयायी इन आरोपों से दुखी हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी पूजा स्थल पर चढ़ाए गए चढ़ावे से जुड़े मामले गहरा भावनात्मक महत्व रखते हैं।
दान और चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए यादव ने कहा, सनातन धर्म में, श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे को चुराने से बड़ा कोई पाप नहीं है।
सपा प्रमुख ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा लगाए गए उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि यादव के संबंध दान चोरी मामले के आरोपियों में से एक रामशंकर उर्फ तिन्नू यादव से हैं। यादव ने सवाल उठाया कि विपक्ष द्वारा जवाबी आरोप लगाए जाने के बावजूद भाजपा नेताओं के खिलाफ कोई प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई।
एसआईटी ने इस कथित गबन मामले के सिलसिले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। यह विवाद तब और गहरा गया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने हाल ही में हुई एक बैठक में महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया तथा कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त कर दिया।
इन आरोपों और जवाबी आरोपों ने इस विवाद को एक नया राजनीतिक आयाम दे दिया है, जहां विपक्षी दल जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं मंदिर प्रशासन को वित्तीय प्रबंधन पर बढ़ते कड़े सवालों का सामना करना पड़ रहा है।