एफबीआई की वैश्विक अपराध सिंडिकेट का मामला उलझा
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब पुलिस के अधिकारी गुरिंदरजीत सिंह नागरा और कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उगाही रैकेट और आपराधिक सिंडिकेट चलाने के आरोप तय किए हैं। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, यह सिंडिकेट भारत से संचालित हो रहा था और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार जबरन वसूली, लक्षित हत्याओं टार्गेटेड किलिंग्स, गोलीबारी और मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त था।
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई वर्तमान में अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद है। यह पूरी कार्रवाई ऑपरेशन हार्डबॉल का हिस्सा है, जो अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध समूहों के खिलाफ एफबीआई के नेतृत्व में चलाया जा रहा एक वैश्विक अभियान है। इस अभियान के तहत अब तक अमेरिका, कनाडा और यूरोप में कम से कम 24 गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं और 37 आपराधिक आरोप दर्ज किए गए हैं।
अमेरिकी न्याय विभाग ने मंगलवार को पंजाब से जुड़े भारतीय मूल के तीन ट्रांसनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) गिरोहों के खिलाफ आरोप पत्र जारी किए। इनमें बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर सिंह ढांडा के नेतृत्व वाला आपराधिक संगठन शामिल है। अमेरिकी अदालत के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि पंजाब में फैले कथित भ्रष्टाचार के कारण इन वैश्विक आपराधिक गिरोहों को विभिन्न महाद्वीपों में फलने-फूलने का मौका मिला।
अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात पर चिंता जताई कि भारतीय जेलें बिश्नोई और भगवानपुरिया जैसे गैंगस्टरों को सलाखों के पीछे से अपनी आपराधिक गतिविधियां चलाने से रोकने में नाकाम रही हैं। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह पुलिस अधिकारी नागरा सहित इन सभी आरोपियों के प्रत्यर्पण की मांग करेगा।
लॉरेंस बिश्नोई पर लगे आरोपों में कनाडाई धरती पर प्रतिबंधित संगठन के नेता और भारत द्वारा घोषित आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश देने का मामला भी शामिल है। जून 2023 में निज्जर की कनाडा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार के एजेंटों पर इसका आरोप लगाया था, जिसे नई दिल्ली ने सिरे से खारिज कर दिया था।
हालांकि, इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस की डिप्टी कमिश्नर लिसा मोरेलैंड ने बुधवार को बयान दिया कि निज्जर की हत्या की जांच कर रहे अधिकारियों को इस साजिश में भारत सरकार के अधिकारियों के शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला है। एफबीआई ने गोल्डी बराड़ की गिरफ्तारी में मददगार जानकारी देने वाले को 50,000 डॉलर तक के इनाम की घोषणा की है।