Breaking News in Hindi

कद्दावर मंत्री भूपेंद्र यादव का स्टाफ रातोंरात बदला गया

भाजपा के सारे नेता सवाल से भागते नजर आ रहे हैं

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव सहित उनके निजी स्टाफ के चार सदस्यों को एक साथ हटाए जाने के अभूतपूर्व फैसले ने दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। इस कदम को संभावित केंद्रीय कैबिनेट फेरबदल से पहले एक बड़े उलटफेर के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

यह सुगबुगाहट तब और तेज हो गई जब भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन मंगलवार को अपना जम्मू दौरा अचानक बीच में ही छोड़कर दिल्ली लौट आए। उनके इस दौरे में माता वैष्णो देवी की यात्रा भी शामिल थी। भाजपा सूत्रों के अनुसार, उन्हें राजधानी में एक आपातकालीन बैठक के लिए बुलाया गया था, हालांकि बैठक के एजेंडे का खुलासा नहीं किया गया है।

यादव के स्टाफ से जुड़े इन चार अधिकारियों को 3 जुलाई को जारी अलग-अलग आदेशों के जरिए हटाया या बर्खास्त किया गया था, लेकिन यह मामला सोमवार रात और मंगलवार को सार्वजनिक हुआ। नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी मंत्री के पूरे निजी स्टाफ को एक झटके में हटा दिया गया हो।

सरकार ने इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि यह सफाई प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर की गई है, जो यह दर्शाता है कि यादव के नेतृत्व वाले मंत्रालय के कामकाज को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं थीं। भूपेंद्र यादव भाजपा के सबसे प्रमुख ओबीसी नेताओं और संगठनात्मक रणनीतिकारों में से एक हैं। उद्योगों को संयंत्र लगाने से पहले पर्यावरण मंजूरी लेनी होती है, इसलिए यह मंत्रालय बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यादव हाल के महीनों में काफी हाई-प्रोफाइल राजनीतिक भूमिका में रहे हैं। उन्होंने बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा के मुख्य चुनाव प्रभारी के रूप में काम किया और बाद में तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के दलबदल में भी उनकी अहम भूमिका रही। इस पूरे मामले पर यादव ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सरकार में बड़े फेरबदल की जमीन तैयार किए जाने के बीच कुछ अन्य केंद्रीय मंत्रियों के कार्यालयों में भी ऐसी ही कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

नितिन नबीन के जनवरी में पार्टी अध्यक्ष का पद संभालने के बाद से ही संगठनात्मक फेरबदल लंबित है। इस कार्रवाई के तहत पर्यावरण मंत्री के निजी सचिव अमर सिंह (2010 बैच के आईआरएस अधिकारी) और अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश कुमार सिंह को उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया है।

वहीं राजनीतिक तौर पर नियुक्त दो अन्य सहयोगियों—अतिरिक्त निजी सचिव आयुष शरण सिंह और मंत्री के करीबी माने जाने वाले अतिरिक्त सहायक सचिव सिद्धार्थ यादव को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। अमर सिंह के आदेश में कहा गया है कि उन्हें प्रशासनिक आधार पर राजस्व विभाग में वापस भेजा गया है। मंत्रियों के पूरे निजी स्टाफ को एक साथ बदले जाने की इस घटना ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद के एक बड़े हिस्से को असहज कर दिया है।

अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आगामी फेरबदल में बाहर किए जाने का डर कई लोगों में समा गया है। एक भाजपा सांसद ने कहा, यह अटकलें हैं कि कुछ और मंत्रियों के निजी स्टाफ भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। पीएमओ मंत्रियों के कार्यालयों पर पैनी नजर रखता है और हाल के महीनों में कुछ स्टाफ सदस्यों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की रिपोर्ट सामने आई थीं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्र यादव के कार्यालय पर हुई इस कार्रवाई को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार के सदस्यों से जुड़े उज्जैन भूमि सौदों के खुलासे के बाद पीएमओ की बढ़ी हुई सतर्कता से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि भाजपा ने सार्वजनिक रूप से मोहन यादव का बचाव किया है, लेकिन कुछ नेताओं का निजी तौर पर मानना है कि इस विवाद और राम मंदिर में दान की कथित चोरी के मामलों ने केंद्र सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी छवि को प्रभावित किया है।