सुपरनोवा विस्फोट के घटनाक्रमों को दर्ज किया गया
सामान्य से दस गुणा अधिक विस्फोट
सुपरनोवा एसएन 2024 एएफएवी को देखा
इसकी चमक घटती बढ़ती नजर आ रही है
राष्ट्रीय खबर
रांचीः खगोलविदों ने ब्रह्मांड में पहली बार एक मैग्नेटर के जन्म को लाइव देखा है। मैग्नेटर वास्तव में अत्यधिक चुंबकीय शक्ति वाला और तेजी से घूमने वाला एक विशेष न्यूट्रॉन तारा होता है। इस ऐतिहासिक खोज ने विज्ञान जगत की उस थ्योरी की पुष्टि कर दी है कि ब्रह्मांड के सबसे चमकदार तारों के विस्फोट (सुपरनोवा) के पीछे इन अजीबोगरीब खगोलीय पिंडों का ही हाथ होता है। यह खोज नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुई है, जो यूसी बर्कले के एक भौतिक विज्ञानी द्वारा 16 साल पहले दिए गए सिद्धांत को साबित करती है। इसके साथ ही, मरते हुए तारों के प्रकाश में एक अनोखी गूंज देखी गई है, जिसे केवल आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत से ही समझा जा सकता है।
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ब्रह्मांड में सुपरल्युमिनस सुपरनोवा सबसे शानदार और शक्तिशाली विस्फोटों में से हैं, जो सामान्य सुपरनोवा से 10 गुना अधिक चमकीले होते हैं। सालों से वैज्ञानिक इस उलझन में थे कि एक विशाल तारे का केंद्र नष्ट होने के बाद भी यह विस्फोट महीनों तक इतना चमकदार कैसे बना रहता है।
साल 2010 में यूसी बर्कले के एस्ट्रोफिज़िसिस्ट डैन कासेन ने सुझाव दिया था कि इस अतिरिक्त ऊर्जा का स्रोत एक नवजात मैग्नेटर हो सकता है। जब कोई विशाल तारा मरता है, तो उसका कोर ब्लैक होल बनने के बजाय एक बेहद घने न्यूट्रॉन तारे में बदल जाता है। यदि उस तारे में मजबूत चुंबकीय क्षेत्र हो, तो सिकुड़ने के बाद वह 100 से 1,000 गुना अधिक शक्तिशाली हो जाता है। आकार में महज 10 मील (करीब 16 किमी) होने के बावजूद ये मैग्नेटर एक सेकंड में 1,000 से अधिक बार घूम सकते हैं। इनका यही चुंबकीय क्षेत्र विस्फोट से निकलने वाले मलबे को अतिरिक्त ऊर्जा देता है, जिससे वह लंबे समय तक चमकता रहता है।
यूसी सांता बारबरा के छात्र जोसेफ फराह और उनकी टीम ने साल 2024 में खोजे गए सुपरनोवा एसएन 2024 एएफएवी का अध्ययन किया, जो पृथ्वी से लगभग एक अरब प्रकाश वर्ष दूर है। उन्होंने देखा कि इस सुपरनोवा की चमक सामान्य रूप से कम होने के बजाय रुक-रुक कर घट-बढ़ रही थी। प्रकाश के इस उतार-चढ़ाव का पैटर्न बिल्कुल किसी पक्षी की चहचहाहट जैसा था।
वैज्ञानिकों ने पाया कि विस्फोट के बाद मलबे का कुछ हिस्सा वापस नवजात मैग्नेटर पर गिरा, जिससे उसके चारों ओर एक तिरछी डिस्क बन गई। आइंस्टीन के सिद्धांत के अनुसार, जब यह चुंबकीय तारा तेजी से घूमता है, तो वह अपने आसपास के स्पेस-टाइम के ताने-बाने को भी साथ खींचता है, जिसे लेंस-थिरिंग प्रीसेशिन कहते हैं।
इस खिंचाव के कारण वह डिस्क डगमगाने लगी और ब्रह्मांडीय लाइटहाउस की तरह चमकने लगी। गणना के अनुसार, यह न्यूट्रॉन तारा हर 4.2 मिलीसेकंड में एक चक्कर लगा रहा है और इसका चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी से 300 ट्रिलियन गुना अधिक मजबूत है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में वेरा सी. रुबिन वेधशाला के शुरू होने के बाद ब्रह्मांड के ऐसे कई और गहरे रहस्य सामने आएंगे।
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