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भारत और जापान के सोलहवें वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद बयान

आतंकवाद और उग्रवाद ही सबसे बड़ा खतरा

  • ताकाइची ने पहलगाम घटना की निंदा की

  • टेरर फंडिंग के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई

  • दोनों का सहयोग से एशिया की भलाई

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: भारत और जापान के बीच कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए आयोजित किए गए 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद एक व्यापक संयुक्त बयान जारी किया गया है। इस शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों वैश्विक नेताओं ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों व अभिव्यक्तियों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है।

वार्ता के दौरान, दोनों प्रधानमंत्रियों ने पिछले साल 22 अप्रैल को भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए उसकी तीव्र भर्त्सना की। इसके साथ ही, दोनों नेताओं ने 29 जुलाई 2025 को जारी की गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की निगरानी टीम की उस महत्वपूर्ण रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया, जिसमें घाटी में सक्रिय आतंकवादी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट  की संदिग्ध गतिविधियों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले साल 10 नवंबर को हुए आतंकवादी हमले को लेकर भी गहरा रोष व्यक्त किया और इसकी गंभीर निंदा की। दोनों शीर्ष नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि इस तरह के निंदनीय कृत्य के वास्तविक अपराधियों, योजनाकारों, आयोजकों और उन्हें वित्तीय मदद (टेरर फंडिंग) देने वाले आकाओं को बिना किसी देरी के न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए।

आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो-टॉलरेंस की नीति को आगे बढ़ाते हुए, उन्होंने अल कायदा, आईएसआईएस (दाएश), लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके सभी मुखौटा (प्रॉक्समी) संगठनों सहित संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित सभी आतंकवादी समूहों और संस्थाओं के खिलाफ ठोस और समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि दुनिया से आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को पूरी तरह से खत्म करना, उनके वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करना, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों के साथ उनके गठजोड़ को तोड़ना और आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही को पूरी तरह से रोकना बेहद आवश्यक है।

उन्होंने यह भी नोट किया कि इन विशिष्ट क्षेत्रों में भारत और जापान के बीच बढ़ता द्विपक्षीय सहयोग न केवल दोनों देशों को लाभान्वित करेगा, बल्कि यह क्वाड के सामूहिक प्रयासों को भी और अधिक मजबूती व पूरक क्षमता प्रदान करेगा। अंत में, दोनों नेताओं ने इस पूरे क्षेत्र की क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने और दीर्घकालिक शांति को बढ़ावा देने के लिए आसियान सदस्य देशों के साथ सहयोग के महत्व पर भी विशेष प्रकाश डाला।