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आयोग की बागी गुट से मुलाकात के बाद टीएमसी की प्रतिक्रिया

चुनाव आयोग फिर से भाजपा के इशारे पर चल रहा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सागरिका घोष और सौगत रॉय ने गुरुवार को भारत निर्वाचन आयोग पर भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया है। यह आरोप आयोग द्वारा ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट को मिलने का समय देने के बाद लगाया गया है, जो असली तृणमूल होने का दावा कर रहा है।

नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने सवाल उठाया कि कथित तौर पर पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने के लिए निष्कासित किए गए व्यक्तियों को चुनाव आयोग द्वारा अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों के रूप में कैसे मान्यता दी जा सकती है। घोष ने आरोप लगाया, अब देश के सामने यह स्पष्ट हो गया है कि भारत का चुनाव आयोग अब स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा है। चुनाव आयोग को भाजपा, विशेष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्देशित किया जा रहा है।

उन्होंने तर्क दिया कि आयोग के अपने नियमों के तहत, केवल एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के विधिवत अधिकृत प्रतिनिधियों को ही चुनाव आयोग से मिलने या उसकी ओर से आधिकारिक प्रतिनिधित्व सौंपने का अधिकार है। उन्होंने पूछा, जिन व्यक्तियों ने कथित तौर पर पार्टी अनुशासन का उल्लंघन किया और विभिन्न होटलों में बैठकें कीं, उन्हें चुनाव आयोग द्वारा पार्टी के वैध प्रतिनिधियों के रूप में कैसे मान्यता दी जा सकती है? घोष ने जोर देकर कहा कि केवल अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि ही आयोग के समक्ष पार्टी का आधिकारिक रुख पेश कर सकते हैं। उन्होंने आगे तर्क दिया कि केवल एक विधायी दल (लेजिस्लेटिव पार्टी) किसी राजनीतिक दल के विलय का फैसला नहीं कर सकता।

शिवसेना मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से माना था कि संसद सदस्य या विधानसभा सदस्य खुद से किसी राजनीतिक दल का विलय नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, ऐसा निर्णय केवल राजनीतिक दल द्वारा ही लिया जा सकता है।

लोकसभा सांसद सौगत रॉय ने भी चुनाव आयोग की आलोचना की कि उसने टीएमसी के निष्कासित सदस्यों को पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी से कोई अधिकार पत्र न होने के बावजूद पूर्ण पीठ (फुल बेंच) से मिलने की अनुमति दी। आयोग के इस फैसले को अभूतपूर्व बताते हुए रॉय ने आरोप लगाया कि यह बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर क्षेत्रीय राजनीतिक दलों में विभाजन पैदा करने के प्रयास के तहत हुई थी। रॉय ने दलबदल विरोधी कानून की धारा 4(1) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यह किसी विधायी दल को एकतरफा रूप से दूसरे राजनीतिक दल में विलय करने की अनुमति नहीं देता है।

इस बीच, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने गुरुवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बनर्जी ने कहा कि उनके गुट ने 22 जून को पार्टी का एक विशेष सत्र बुलाया था और ममता बनर्जी तथा अभिषेक बनर्जी दोनों को छोड़कर एक नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया था। उन्होंने दावा किया कि उनके गुट को पार्टी के दो-तिहाई विधायकों का समर्थन प्राप्त है।

बागी नेताओं के दावों को खारिज करते हुए वरिष्ठ टीएमसी नेता कुणाल घोष ने ममता बनर्जी के प्रति पार्टी के समर्थन को दोहराया। घोष ने कहा, तृणमूल का मतलब ममता बनर्जी है। जो आज असली गुट होने का दावा कर रहे हैं, उन्होंने सिर्फ दो महीने पहले चुनाव आयोग को हलफनामा सौंपा था, जिस पर ममता-दी और अभिषेक दोनों के हस्ताक्षर थे। क्या होता है जब कोई किराएदार अचानक घर का मालिक होने का दावा करने लगे? सूत्रों के अनुसार, बागी समूह ने चुनाव आयोग से कहा है कि वे ही असली तृणमूल हैं और उन्होंने पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और पार्टी फंड पर नियंत्रण की मांग की है।