ट्रस्ट के लोगों पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा
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चोरी के सबूत पर निकल रहे हैं
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विदेशी मुद्रा भी छापा में जब्त हुए
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केंद्रीय एजेंसियों ने कोई पहल नहीं की
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में कथित हेराफेरी और चोरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद में बदल चुका है। जून 2026 की शुरुआत में सामने आए इस मामले ने न केवल मंदिर प्रबंधन की साख पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे तक की नौबत आ गई है।
जून 2026 के मध्य में, जब दान पेटी से पैसे चोरी और कुप्रबंधन की खबरें तेजी से फैलीं, तब उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर एक तीन-सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया। इस टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी (लखनऊ रेंज) किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल थे।
एसआईटी की प्रारंभिक जांच में मंदिर प्रबंधन की लापरवाही के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि दान की गणना के दौरान मानक संचालन प्रक्रियाओं का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया था। न तो सीसीटीवी फुटेज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा गया और न ही कर्मचारियों की तलाशी की उचित व्यवस्था थी।
एसआईटी की रिपोर्ट के बाद 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई और 26 जून को मंदिर के दान और नकदी प्रबंधन से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से लाखों रुपये की नकदी और विदेशी मुद्रा बरामद की गई।
बढ़ते दबाव और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा है कि ट्रस्ट की अगली बैठक में इन इस्तीफों पर विचार किया जाएगा।
यह मामला अब एक राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने इसे करोड़ों के घोटाले की संज्ञा देते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है। वर्तमान में, पुलिस ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और मंदिर के प्रशासक गोपाल राव से पूछताछ की है। जांच अब केवल चोरी तक सीमित न रहकर वित्तीय अनियमितताओं और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े नेटवर्क की ओर बढ़ रही है।