जन्म प्रमाण पत्र जन्म का सबूत नहीं
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मंत्रालय के अफसर ने कही बात
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नागरिकता का प्रमाण क्या होगा
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आधार कार्ड पहले से ही अस्वीकृत
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः विदेश मंत्रालय ने हाल ही में स्पष्ट किया था का पासपोर्ट दरअसल भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है। इस चर्चा के जारी रहने के बीच ही केंद्रीय जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दिए गए एक बयान ने देश भर में एक नई बहस छेड़ दी है। अधिकारी ने दावा किया कि जन्म प्रमाण पत्र, जन्म का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब नागरिकों के मन में अपनी पहचान और नागरिकता के दस्तावेजों को लेकर पहले से ही कई सवाल हैं।
अधिकारी ने स्पष्ट किया, यह एक आम गलतफहमी है कि जन्म प्रमाण पत्र, जिसमें जन्म की तारीख, स्थान और माता-पिता के नाम लिखे होते हैं, यह सिद्ध करने के लिए निर्णायक साक्ष्य है कि आप पैदा हुए हैं। कानूनी और प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह हमेशा पूर्ण सत्य नहीं माना जा सकता।
यह हैरान कर देने वाला खुलासा तब हुआ है जब हालिया खबरों में यह चर्चा जोरों पर है कि भारतीय पासपोर्ट भी भारतीय नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं माना जाता है। 1.48 अरब की आबादी वाले देश में इस तरह के बयानों ने लोगों को असमंजस में डाल दिया है। कई लोगों के लिए, जन्म प्रमाण पत्र एक प्राथमिक दस्तावेज है, जिसका उपयोग वे अपनी नागरिकता साबित करने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए करते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों का गहरा असर आम जनता पर पड़ेगा। जहाँ एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया और दस्तावेजों के सरलीकरण की बात कर रही है, वहीं इस तरह की प्रशासनिक व्याख्याएं नागरिकों को यह सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि यदि जन्म प्रमाण पत्र जन्म का सबूत नहीं है, तो फिर अस्तित्व की पहचान के लिए आधार क्या होगा?
अभी तक इस मामले में मंत्रालय की ओर से कोई विस्तृत दिशानिर्देश जारी नहीं किए गए हैं। हालांकि, इस साक्षात्कार ने देश के भीतर एक गंभीर चर्चा को जन्म दिया है कि क्या भारत में पहचान के स्थापित मानकों को फिर से परिभाषित किया जा रहा है। नागरिकों के बीच यह चिंता स्वाभाविक है कि यदि प्राथमिक पहचान दस्तावेज ही संदेह के घेरे में हैं, तो भविष्य में प्रशासनिक कार्यों में और अधिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।