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जनता को दूसरी जानकारी देने के बाद सरकार ने पलटी मारी

इथेनॉल पर कोर्ट से कहा यह एक प्रयोग है

  • एक साल तक यह प्रयोग चलेगा

  • पहले कहा गया यह सुरक्षित है

  • इंजन पर प्रभाव को लेकर चिंता

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः  केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि पेट्रोल में 20 फीसद  इथेनॉल सम्मिश्रण (ई20) का कार्यक्रम अभी एक जारी प्रयोग है और इस नीति का वास्तविक प्रभाव अगले साल तक और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएगा। यह टिप्पणी उस समय आई है जब देश में ई20 ईंधन के उपयोग को लेकर पुराने वाहनों के इंजन पर पड़ने वाले प्रभाव और ईंधन दक्षता में कमी जैसी चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 23 जून के एक आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उच्च न्यायालय ने तेल विपणन कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले एक डिस्टिलरी (शराब बनाने वाली इकाई) द्वारा इथेनॉल आवंटन बढ़ाने की मांग पर विचार करें।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने केंद्र की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि इथेनॉल आवंटन की प्रक्रिया अक्टूबर 2025 में ही पूरी हो चुकी है और आपूर्ति अनुबंधों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक आपूर्तिकर्ता के लिए आवंटन प्रक्रिया को फिर से खोला गया, तो इससे पूरे देश में चल रहे इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम की आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है और कई अन्य आपूर्तिकर्ता भी समान दावे कर सकते हैं, जिससे कानूनी जटिलताएं बढ़ेंगी। सरकार ने इस मामले को उच्च न्यायालयों से सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने के लिए याचिका दायर करने की अनुमति मांगी है, ताकि अक्टूबर में अनुबंध नवीनीकरण से पहले निर्णय लिया जा सके।

सुनवाई के बाद अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट किया कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का निर्णय एक नीतिगत फैसला है, जिसके बदलने की संभावना नहीं है। हालांकि, कंपनियों को उपलब्ध कराए जाने वाले इथेनॉल की मात्रा मांग के आधार पर घट या बढ़ सकती है। भारत ने अपने लक्ष्य से पांच साल पहले ही 2025 में 20 फीसद इथेनॉल मिश्रण का आंकड़ा हासिल कर लिया था और अब सरकार का लक्ष्य 2030 तक इसे 30 फीसद तक ले जाना है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने हाल ही में उन दावों को भी खारिज किया है जिनमें कहा जा रहा था कि ई20 ईंधन के उपयोग से वाहन बीमा रद्द हो सकता है। मंत्रालय ने इसे सुरक्षित, उपभोक्ता के अनुकूल और आर्थिक रूप से लाभकारी बताते हुए कहा कि इससे भारत को कच्चे तेल के आयात में कटौती कर 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है।