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परमेश्वरी देवी के परोपकारी संकल्प ने दी दो लोगों को दृष्टि

नेत्रदान से मिली दो जरूरतमंद लोगों को नई रोशनी

राष्ट्रीय खबर

रांची: मृत्यु के उपरांत भी किसी के जीवन में उजाला फैलाना सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना जाता है। इसी नेक उद्देश्य को चरितार्थ करते हुए रांची की 89 वर्षीय परमेश्वरी देवी ने मरणोपरांत अपने नेत्रदान कर समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके इस निस्वार्थ निर्णय से दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को नई रोशनी मिली है, जिससे उनके अंधेरे जीवन में खुशहाली का नया सवेरा आया है।

परमेश्वरी देवी का गत दिनों वृद्धावस्था के कारण निधन हो गया। अपने जीवनकाल में ही उन्होंने नेत्रदान करने की प्रबल इच्छा व्यक्त की थी। उनकी मृत्यु के पश्चात शोकाकुल होने के बावजूद, उनके परिवार के सदस्यों ने बेहद परिपक्वता और संवेदनशीलता का परिचय दिया। उन्होंने शोक को दरकिनार कर परमेश्वरी देवी की अंतिम इच्छा को पूरा करना अपना कर्तव्य समझा और तुरंत इसकी सूचना ‘कश्यप मेमोरियल आई बैंक’ को दी। उनका परिवार मोरहाबादी में रहता है और वह स्वर्गीय सीताराम केडिया की पत्नी थीं।

सूचना मिलते ही कश्यप मेमोरियल आई बैंक की विशेषज्ञ डॉ. निधि कश्यप अपनी टीम के साथ बिना समय गंवाए उनके निवास स्थान पर पहुंचीं। वहां अत्यंत गरिमापूर्ण और सुरक्षित तरीके से नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया गया। दान में प्राप्त इन नेत्रों को अस्पताल ले जाया गया, जहां जरूरतमंदों की पूर्व निर्धारित प्रतीक्षा सूची (Waiting List) के अनुसार उनका प्रत्यारोपण किया जाएगा। शीघ्र ही दो लोग परमेश्वरी देवी की आंखों के माध्यम से इस सुंदर दुनिया को देख सकेंगे।

अस्पताल के प्रमुख डॉ. बीपी कश्यप ने इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि लगातार चलाए जा रहे जनजागरण अभियानों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि अब लोग मृत्यु के बाद देह और अंगदान को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं। यह सिर्फ नेत्रदान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब अन्य अंगों के दान के प्रति भी समाज में संकोच कम हुआ है और स्थिति में निरंतर सुधार आ रहा है। परमेश्वरी देवी का यह कदम न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह समाज के अन्य लोगों को भी मृत्यु के बाद अंगदान करने की प्रेरणा देता है। इस नेत्रदान के बाद कश्यप मेमोरियल आई बैंक में कुल कॉर्निया प्रत्यारोपण का आंकड़ा 1089 पहुंच गया है।