साइबर फ्रॉड रोकने की दिशा में तकनीकी सहायता की पहल
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कमिशन के लालच में धोखाधड़ी
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बैंक के लोगों की भी मिलीभगत
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सोशल मीडिया पर भी निगरानी
राष्ट्रीय खबर
हैदराबाद के साइबर अपराध जगत में धोखेबाजों ने अब म्यूल बैंक अकाउंट को किराए पर लेने या खरीदने का एक नया और खतरनाक तरीका अपना लिया है। साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके भोले-भाले लोगों को आकर्षक कमीशन का लालच देते हैं और उनके नाम पर करंट या सेविंग अकाउंट खुलवाकर उनका इस्तेमाल अवैध लेनदेन के लिए करते हैं। अपनी पहचान छिपाकर की जा रही इस धोखाधड़ी ने पुलिस के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
पिछले पांच महीनों में हैदराबाद पुलिस ने 200 से अधिक म्यूल अकाउंट धारकों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 10 से अधिक महिलाएं शामिल हैं। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए, हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी बढ़ा दी है, जहाँ बैंक खाते खरीदने-बेचने के विज्ञापन पोस्ट किए जाते हैं। पुलिस ऐसे खातों को ट्रैक कर रही है, मामले दर्ज कर रही है और संदिग्ध म्यूल अकाउंट्स को फ्रीज या निष्क्रिय करने की कार्रवाई कर रही है।
हालांकि, पुलिस के इन तमाम प्रयासों के बावजूद इन खातों का दुरुपयोग पूरी तरह से नहीं रुक पा रहा है। बैंकों के साथ बैठकें, आरबीआई से अपील और लापरवाह बैंक कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई के बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में कई बैंक अधिकारी, जिनमें शाखा प्रबंधक तक शामिल हैं, सक्रिय रूप से संलिप्त हैं। हाल ही में कुछ बैंक अधिकारियों के खिलाफ मामले भी दर्ज किए गए हैं, जिनकी जांच जारी है।
कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने नागरिकों को सचेत रहने की सलाह दी है। उन्होंने साफ किया है कि थोड़े से कमीशन के लालच में अपने बैंकिंग क्रेडेंशियल्स (खाता, ओटीपी, पिन) किसी अनजान व्यक्ति को देना एक गंभीर आपराधिक अपराध है। ऐसा करने से व्यक्ति का खाता स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट हो सकता है और उसे गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। पुलिस का कहना है कि वित्तीय सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि नागरिक किसी भी लुभावने ऑफर के झांसे में न आएं और अपनी बैंकिंग गोपनीयता बनाए रखें।