राम मंदिर चंदा चोरी में अब राजनीतिक विवाद तेज
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चंदा चोर लोग हैं सारे के सारे
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आप लोग राम भक्त को नहीं हैं
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सीसीटीवी का नया नामकरण हुआ
राष्ट्रीय खबर
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राजनीति का पारा उस समय और बढ़ गया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में चंदे के कथित गबन को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला। अखिलेश यादव ने भाजपा को भाचपा (भाजपा का नया विस्तार चतुराई, चंदा, चोरी और चालबाजी के रूप में) करार देते हुए कहा कि भाजपा के लिए राष्ट्र प्रथम नहीं, बल्कि चंदा प्रथम की नीति है।
रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा, सनातन धर्म की आड़ में भाजपा पूरा कारोबार चला रही है। यह विश्वासघात की पराकाष्ठा है। उन्होंने मंदिर में लगे सीसीटीवी फुटेज का जिक्र करते हुए सवाल किया कि कैमरे कितनी बार बंद किए गए? उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि, सी.सी.टी.वी. का मतलब अब चंदा चोरी और चढ़ावा चोरी हो गया है। भगवान की आस्था के नाम पर जो चंदा आया, उसे चोरी करना शर्मनाक है।
अखिलेश ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को न तो चंदा मिलेगा, न चढ़ावा और न ही वोट। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, मुख्यमंत्री बार-बार अयोध्या जाने का दावा करते हैं, फिर भी उन्हें वहां हो रही चोरी का पता नहीं चला। इसे ही कहते हैं दीये तले अंधेरा। अगर वहां ऐसी धांधली हो सकती है, तो तहसील और थानों में भ्रष्टाचार का स्तर क्या होगा?
अखिलेश के आरोपों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सीएम योगी ने अयोध्या और हिंदू परंपराओं के प्रति सपा प्रमुख की निष्ठा पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने याद दिलाया कि सपा की सरकार के दौरान ही राम भक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग राम मंदिर निर्माण का विरोध करते थे, उन्हें अब मंदिर के चंदे की चिंता हो रही है। उन्होंने सपा को अराजकता और भ्रष्टाचार का पर्याय बताते हुए कहा कि अखिलेश यादव का यह बयान केवल ध्यान भटकाने और अपनी विफलताओं को छिपाने की एक कोशिश है।
अपने अयोध्या दौरे को लेकर हो रही आलोचनाओं पर अखिलेश ने जवाब दिया कि इटावा में शिव मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद वे अयोध्या जाकर भगवान राम के दर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि मुद्दा उनके दौरे का नहीं, बल्कि मंदिर में हो रही धांधली का है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले राम मंदिर और चंदे का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बिंदु बनता जा रहा है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के आसार हैं।