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राम मंदिर चंदा चोरी के विवाद पर शीर्ष अदालत की राय

अभी इसकी तत्काल सुनवाई जरूरी नहीः सुप्रीम कोर्ट

  • एसआईटी गठन  की मांग की गयी थी

  • अवकाशकालीन पीठ में आया था मामला

  • जुलाई के मध्य में इस पर सुनवाई होगी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के नाम पर मिले चंदे में कथित गबन की जांच के लिए विशेष जांच दल के गठन की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत की आंशिक अवकाश कालीन पीठ में शामिल न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू ने याचिकाकर्ता को स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई ऐसी तात्कालिकता नहीं है जिसके कारण ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान सुनवाई की जाए।

अदालत ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से सवाल किया, आखिर इसमें ऐसी क्या जल्दबाजी है? आसमान नहीं गिर जाएगा अगर इस मामले को कोर्ट के खुलने के बाद सुना जाए। याचिकाकर्ता ने जब यह तर्क दिया कि राज्य सरकार जिस तरह से मामले को संभाल रही है, वह संदेह पैदा करता है, तो पीठ ने उसे आश्वस्त नहीं माना और निर्देश दिया कि इस मामले को अदालत के फिर से खुलने (जुलाई के मध्य में) के बाद सूचीबद्ध किया जाए।

याचिकाकर्ताओं—जिनमें अधिवक्ता अजय कुमार राय, दिनेश कुमार यादव और नरेंद्र कुमार गोस्वामी शामिल हैं—ने अपनी याचिका में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज और दान में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी के पास एक जटिल वित्तीय घोटाले की जांच के लिए आवश्यक फॉरेंसिक और तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव है। याचिकाकर्ताओं ने यह मांग भी की थी कि मंदिर के दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और बैंक रिकॉर्ड जैसे सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को तत्काल प्रभाव से संरक्षित किया जाए, ताकि भविष्य में कोई हेरफेर न हो सके।

इस विवाद की पृष्ठभूमि में हाल ही में सामने आई अनियमितताओं की खबरें हैं, जिसके चलते श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्र के इस्तीफे की पुष्टि हुई है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है और करीब 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद की है। एसआईटी  इस बात की जांच कर रही है कि क्या दान के रूप में मिले धन को अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया या उसे निजी लाभ के लिए इधर-उधर किया गया।