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सोनम वांगचुक के अनशन पर अनेक संगठनों के नेता

जंतर मंतर पर फिर से नागरिक सुविधाएं बंद

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पुलिस ने अनशन शुरू होते ही प्रदर्शन स्थल पर पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं काट दी हैं।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि सोनम वांगचुक के अनशन शुरू करने के तुरंत बाद पुलिस ने जंतर-मंतर पर पानी का कनेक्शन काट दिया और स्वच्छता संबंधी उपायों को रोक दिया। दिपके ने लिखा, हमने वांगचुक जी की उम्र और उनके स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं के बारे में पुलिस को बार-बार सूचित किया, लेकिन कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। हमें आशंका है कि अन्य बुनियादी सुविधाएं भी बंद कर दी जाएंगी। पुलिस क्या करने की कोशिश कर रही है?

सोनम वांगचुक ने रविवार को जंतर-मंतर पर अपना अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया। यहाँ सीजेपी 20 जून से धरना दे रही है। उनकी मुख्य मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल है। यह विरोध प्रदर्शन नीट पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ है। संगठन का दावा है कि इन विवादों के कारण अब तक 21 से अधिक छात्र आत्महत्या कर चुके हैं, जिनकी याद में जंतर-मंतर पर एक प्रतीकात्मक स्मारक भी बनाया गया है। वांगचुक की दो प्रमुख मांगें सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया था कि यदि सरकार उनकी दो प्रमुख मांगों में से किसी एक पर भी ठोस प्रगति करती है, तो वे

सरकार से कोई प्रतिक्रिया न मिलने के बाद वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया। अनशन की शुरुआत से पहले, वांगचुक और दिपके ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रदर्शन में सैकड़ों छात्र, युवा, किसान नेता और आम नागरिक शामिल हुए। इस बीच, अभिजीत दिपके ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कई किसान नेताओं को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस ने नजरबंद कर दिया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। सीजेपी का कहना है कि उनका विरोध देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास की बहाली के लिए है। संगठन ने हाल ही में महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा पेपर लीक का भी उदाहरण देते हुए इसे एक प्रणालीगत विफलता करार दिया है।