म्यांमार की सेना ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई कर दी
एजेंसियां
बैंकॉकः म्यांमार से शुक्रवार को एक चौंकाने वाली खबर और वीडियो सामने आया, जिसमें करोड़ों डॉलर मूल्य के नशीले पदार्थों को सार्वजनिक रूप से आग के हवाले कर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र के नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में 50 टन से अधिक अवैध दवाओं को नष्ट किया गया। इनमें हेरोइन, मेथामफेटामाइन (मेथ), अफीम, केटामाइन, मारिजुआना और क्रिस्टल मेथ शामिल थे, जिनकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 60 करोड़ डॉलर (600 मिलियन डॉलर) आँकी गई है।
यांगून के एंटी-नारकोटिक्स पुलिस फोर्स के पुलिस लेफ्टिनेंट कर्नल आंग म्यात सोए ने जानकारी दी कि इस वर्ष नष्ट किए गए नशीले पदार्थों का बाज़ार मूल्य पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना से भी अधिक है। केवल यांगून में ही 32.1 करोड़ डॉलर मूल्य की 31 अलग-अलग प्रकार की नशीली दवाएँ जलाई गईं। सोशल मीडिया और समाचारों में प्रसारित वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि कैसे विशालकाय ढेर में आग लगाई गई, जिससे काला धुआँ आसमान की ऊँचाइयों को छूता हुआ नज़र आया।
म्यांमार लंबे समय से दुनिया में हेरोइन और मेथामफेटामाइन के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक रहा है। सख्त कार्रवाई के तमाम सरकारी दावों के बावजूद, यह देश पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया के लिए अवैध दवाओं का एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट और उसके बाद उपजे राजनीतिक अस्थिरता व गृहयुद्ध ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। सैन्य सरकार और लोकतंत्र समर्थक समूहों व जातीय सशस्त्र गुटों के बीच जारी इस संघर्ष के कारण देश में नशीले पदार्थों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सरकार की ओर से इन दावों के बीच, सैन्य शासन ने जनवरी में उत्तरी शान राज्य में 12 ड्रग निर्माण स्थलों पर छापेमारी कर अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी का दावा भी किया था। संयुक्त राष्ट्र का नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस हर साल 26 जून को मनाया जाता है। यह दिन दुनिया को नशीली दवाओं से मुक्त समाज बनाने के संकल्प को दोहराने और इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने का एक मंच प्रदान करता है, हालांकि बर्मा जैसे देशों में जमीनी हकीकत इस वैश्विक संकल्प के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।