Breaking News in Hindi

केंद्र के पैसे पर आईएएस अफसर की मनमानी की कलई खुली

अपने ही परिवार के लोगों को लाभ दिलाया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: सरकारी धन के आवंटन और लोक प्रशासन में नैतिकता के विषय पर एक गंभीर बहस छिड़ गई है। द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा की गई एक खोजी पत्रकारिता ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और उनके क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस जांच की दूसरी कड़ी में यह खुलासा हुआ है कि केवल केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ही नहीं, बल्कि कृषि मंत्रालय के सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार के परिवार के सदस्य भी सरकारी खजाने से मिलने वाली भारी सब्सिडी का लाभ उठाने वालों में शामिल हैं।

जांच के अनुसार, पिछले पांच वर्षों की अवधि में नरेश पाल गंगवार की पत्नी, पुत्र और माता ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की विभिन्न योजनाओं के तहत 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी प्राप्त की है। यह धनराशि बागवानी को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से आवंटित की गई थी। इतने बड़े स्तर पर एक वरिष्ठ नौकरशाह के परिवार द्वारा सरकारी अनुदान प्राप्त करने का मामला सीधे तौर पर हितों के टकराव के नैतिक मानदंडों को कटघरे में खड़ा करता है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा अरबों रुपये का फंड जारी किया जा रहा है। इन योजनाओं का मूल उद्देश्य उन छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचना है, जिन्हें वित्तीय सहायता की सर्वाधिक आवश्यकता है। ऐसे में जब नीति निर्धारण करने वाले पदों पर बैठे अधिकारी या उनके परिजन इन सब्सिडी का लाभ उठाते हुए पाए जाते हैं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या इन योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच भी रहा है या नहीं।

फिलहाल, इस मामले पर संबंधित अधिकारियों या कृषि मंत्रालय की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि, यह चुप्पी प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट का विषय बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के खुलासे सरकारी सब्सिडी आवंटन की प्रक्रिया की साख पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। यह घटनाक्रम व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। जब सरकारी पदों पर बैठे लोग या उनके करीबी खुद को उन्हीं योजनाओं का लाभार्थी बना लेते हैं, जिन्हें लागू करने की जिम्मेदारी उनकी होती है, तो यह शासन की निष्पक्षता को गंभीर क्षति पहुँचाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और भविष्य में सब्सिडी वितरण के नियमों में कितनी सख्ती लाती है।