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भारत बांग्लादेश सीमा पर फिर से नागरिकों की वापसी पर तनाव

नो-मैन्स लैंड में फंसे 9 नागरिक, समाधान की कोशिश जारी

  • बांग्लादेश की बीजीबी ने लेने से इंकार कर दिया है

  • गुवाहाटी में भूस्खलन जोखिम पर रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

  • कांगपोकपी में फायरिंग में तीन युवक घायल हुए

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः असम के मनकाचर क्षेत्र में भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। अवैध रूप से रह रहे नौ बांग्लादेशी नागरिकों को जब उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई, तो सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच गतिरोध उत्पन्न हो गया। बीजीबी ने इन नागरिकों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिससे वे नो-मैन्स लैंड में फंस गए हैं। हालांकि, बीएसएफ द्वारा इन लोगों को मानवीय आधार पर सहायता प्रदान की जा रही है और दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समाधान के लिए फ्लैग मीटिंग का दौर जारी है।

दूसरी ओर, गुवाहाटी में किए गए एक व्यापक सर्वे ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शहर के 20 प्रमुख इलाकों में चिन्हित 366 उच्च-जोखिम वाली जगहों पर हुए इस अध्ययन से पता चला है कि भूस्खलन के 95 प्रतिशत मामलों का कारण मानवीय हस्तक्षेप है। खारगुली, नूनमती और नरेंगी जैसे इलाकों में बेतरतीब तरीके से पहाड़ी काटने और खड़ी ढलानों पर बिना नियमों के निर्माण ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, खराब जल निकासी और अनियोजित शहरी विकास के कारण मानसून के दौरान आपदा का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है।

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में आदिवासी समुदायों के दो गुटों के बीच गोलीबारी की घटना ने क्षेत्र की शांति को एक बार फिर भंग कर दिया है। लेइलोन वैफेई गांव में हुई इस हिंसा में तीन युवा घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए इंफाल के रिम्स अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव और बढ़ गया, जब घायलों के भर्ती होने के विरोध में प्रदर्शनकारी जमा हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।