Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Uttarakhand Disaster Management Model: ब्रिक्स देशों ने मानी उत्तराखंड की धाक; आपदा प्रबंधन मॉडल की ... Akshay Kumar Charity: क्या अक्षय कुमार सिर्फ पैसा कमाने के लिए करते हैं फिल्में? एक्टर ने चैरिटी के ... Manav Suthar Test Debut: टेस्ट डेब्यू पर 6 विकेट लेकर रचा इतिहास; मानव सुथार ने 18 साल का सूखा किया ... Israel-Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में फिर छिड़ा युद्ध का खतरा; क्या नेतन्याहू की जंग की जिद बन रही है ... Gold-Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट; जानें क्या है आज का नया भाव Environmental Impact of AI: एआई की बढ़ती मांग से बढ़ रहा जल संकट; 2027 तक हालात हो सकते हैं गंभीर Kalashtami Vrat 2026: कालाष्टमी पर काल भैरव देव की विशेष पूजा; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व Banarasi Kachori Sabji Recipe: घर पर बनाएं बनारस का प्रसिद्ध नाश्ता; कचौड़ी-सब्जी बनाने की आसान विधि MP Rajya Sabha Election 2026: तीसरी सीट पर भाजपा का दांव; महेश केवट के नामांकन के बाद बढ़ी सियासी हलच... Earthquake in Northeast: भूटान के पास 5.7 तीव्रता का जोरदार भूकंप; सिक्किम और बंगाल तक महसूस किए गए ...

Environmental Impact of AI: एआई की बढ़ती मांग से बढ़ रहा जल संकट; 2027 तक हालात हो सकते हैं गंभीर

आज के दौर में एआई टूल्स हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया रिवरसाइड की एक हालिया रिसर्च ने एक चौंकाने वाला सच उजागर किया है। शोध के अनुसार, एआई के काम करने के पीछे एक बड़ी ‘जल खपत’ छुपी है। जब आप एआई से 100 शब्द लिखवाते हैं, तो इस काम को अंजाम देने के लिए डेटा सेंटर्स को लगभग 519 मिलीलीटर पानी की आवश्यकता होती है, जो एक सामान्य पानी की बोतल के बराबर है।

🏭 डेटा सेंटर्स और वाटर-बेस्ड कूलिंग सिस्टम

एआई मॉडल्स को चलाने के लिए विशाल डेटा सेंटर्स की जरूरत होती है, जिनमें हजारों सर्वर्स काम करते हैं। ये सर्वर्स भारी मात्रा में गर्मी उत्पन्न करते हैं। इस गर्मी को नियंत्रित करने के लिए ‘वाटर-बेस्ड कूलिंग सिस्टम’ का उपयोग किया जाता है, जो इन सर्वर्स को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी खर्च करता है। जैसे-जैसे एआई की मांग बढ़ रही है, डेटा सेंटर्स का आकार और उनकी संख्या भी बढ़ती जा रही है।

⚠️ 2027 तक बढ़ सकता है जल संकट का खतरा

शोधकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, एआई के लिए पानी का स्रोत अक्सर ऐसे इलाके होते हैं जहाँ जलस्तर पहले से ही कम है। मेक्सिको, चिली और अमेरिका जैसे देशों में स्थानीय लोग डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को लेकर चिंतित हैं। यदि एआई का विस्तार इसी गति से जारी रहा, तो 2027 तक स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। अनुमान है कि एआई की जल खपत उस स्तर तक पहुंच सकती है, जो ब्रिटेन के एक साल के कुल भूजल निष्कर्षण का लगभग आधा हिस्सा हो।

🌍 समाधान की ओर बढ़ना जरूरी

माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी यह स्वीकार किया है कि एआई पर बढ़ते दबाव के कारण उनकी पानी की खपत में वृद्धि हुई है। एआई का विकास जरूरी है, लेकिन अब समय आ गया है कि टेक कंपनियां ‘इको-फ्रेंडली कूलिंग सिस्टम’ और पानी के पुनर्चक्रण (Water Recycling) पर ध्यान दें ताकि इस तकनीकी प्रगति की कीमत पर्यावरण को न चुकानी पड़े।