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तमिलनाडु के नारियल किसानों ने नाफेड से नाराजगी जतायी

कोपरा खरीद में देर से हो रहा है आर्थिक नुकसान

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः तमिलनाडु के नारियल किसान, विशेष रूप से डेल्टा क्षेत्र के उत्पादक, गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। खुले बाजार में कोपरा (सूखा नारियल) की कीमतों में लगातार गिरावट और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नाफेड) की मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीद शुरू करने में देरी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इस स्थिति से निपटने के लिए किसान अब राज्य सरकार से केरल की तर्ज पर केराफेड के माध्यम से सीधे ताजा नारियल खरीदने की अपील कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि नाफेड द्वारा हर साल अप्रैल-मई में की जाने वाली वार्षिक खरीद अभी तक शुरू नहीं हुई है। इस देरी का फायदा उठाकर निजी खरीदारों ने बाजार में अपना प्रभुत्व जमा लिया है और वे मनमाने दामों पर खरीद कर रहे हैं। ईस्ट कोस्ट कोकोनट फार्मर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ईवी गांधी ने बताया, नाफेड का समर्थन मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम तय है, जबकि निजी खिलाड़ी शुरुआत में 150 रुपये तक का लालच देते हैं। लेकिन जब किसान अपना माल लेकर जाते हैं, तो रंग खराब होने जैसे बहाने बनाकर कीमतें घटाकर 120 रुपये या उससे भी कम कर दी जाती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह नाफेड पर दबाव बनाए ताकि खरीद प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके। इसके अलावा, उन्होंने एक वैकल्पिक और टिकाऊ मॉडल का सुझाव दिया है। केरल सरकार केराफेड के माध्यम से 40 रुपये प्रति किलो की दर से ताजा नारियल खरीदती है। तमिलनाडु के किसान चाहते हैं कि यहां भी इसी तरह की व्यवस्था लागू हो ताकि कोपरा के स्टॉक के जमा होने और उसके खराब होने की समस्या से बचा जा सके।

किसानों का एक पुराना सुझाव यह भी है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बांटे जाने वाले पाम ऑयल की जगह नारियल तेल का वितरण किया जाए, जिससे स्थानीय उत्पादकों को बाजार मिल सके। किसानों ने बताया कि कुछ महीने पहले केरल के अधिकारियों ने तमिलनाडु से 100 टन कोपरा प्रतिदिन खरीदने की इच्छा जताई थी, लेकिन पिछली सरकार की कथित उदासीनता के कारण वह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। अब किसान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मिलकर अपनी इन मांगों को मजबूती से रखने की तैयारी कर रहे हैं। नारियल उत्पादकों का कहना है कि यदि सरकार ने तत्काल कदम नहीं उठाए, तो उन्हें आने वाले सीजन में भारी ऋण और बदहाली का सामना करना पड़ेगा।