वैचारिक मतभेदों को झटका या अचंभा ना समझेः आंबेकर
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सोशल मीडिया पर जारी की गयी राय
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लोकतंत्र में बहस और असहमति सामान्य
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हर किसी को राय जाहिर करने का हक है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः सोशल मीडिया पर कॉक्रोच जनता पार्टी को लेकर चल रही तीखी चर्चाओं और उपजे विवादों के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस पूरे मामले को शांत करने का प्रयास किया है। संघ ने सोशल मीडिया पर मचे इस शोर को तूल न देते हुए एक बेहद संतुलित और परिपक्व रुख अपनाया है। आरएसएस का कहना है कि एक स्वस्थ और जीवंत लोकतंत्र में सार्वजनिक बहस, वैचारिक असहमति और अलग-अलग दृष्टिकोण का सामने आना एक बेहद सामान्य और नियमित प्रक्रिया है, इसे किसी झटके या अचंभे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
नागपुर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इस विषय पर संगठन का आधिकारिक दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा और ताना-बाना इतना मजबूत है कि वह किसी भी प्रकार की खुली चर्चा, तीखी आलोचना और विविध विचारों को आसानी से समाहित कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के विमर्शों या सोशल मीडिया ट्रेंड्स से किसी भी प्रकार की घबराहट, चिंता या असुरक्षा की भावना पैदा होने की आवश्यकता नहीं है।
सुनील आंबेकर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सार्वजनिक संवाद, चाहे वह समाचार पत्रों एवं टेलीविजन जैसे पारंपरिक मीडिया के माध्यम से हो रहा हो या फिर ट्विटर, फेसबुक जैसे आधुनिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर, उसे हमेशा लोकतांत्रिक भागीदारी के एक स्वाभाविक परिणाम के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने इंगित किया कि लोकतंत्र की असली ताकत इसी बात में है कि वहां हर नागरिक को अपनी राय रखने का अवसर मिले। संघ की तरफ से आया यह बयान ऐसे समय में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब कॉक्रोच जनता पार्टी और उसके संस्थापकों को लेकर अदालती कार्रवाई और तीखी बयानबाजी का दौर चल रहा है। इस बयान के जरिए आरएसएस ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के बीच संतुलन बनाने का संदेश दिया है।