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पंजाब के आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकार से फायदा

तमाम ऐसे कर्मचारी नियमित किये जाएंगे

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़: पंजाब के शहरी निवासियों और आम जनता के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार द्वारा नगर निकायों के कर्मचारियों की प्रमुख और लंबे समय से लंबित मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद सफ़ाई कर्मचारियों ने गुरुवार को अपनी 16 दिनों से चली आ रही राष्ट्रव्यापी हड़ताल को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया है। सरकार और यूनियनों के बीच बनी इस आम सहमति के बाद अब राज्य भर के सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में ठप पड़ा सफ़ाई का काम तुरंत प्रभाव से फिर से शुरू हो सकेगा।

राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के बीच यह महत्वपूर्ण समझौता पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और म्यूनिसिपल मुलाज़म सफ़ाई कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों के बीच आयोजित तीसरे दौर की गहन द्विपक्षीय वार्ता के बाद हुआ। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान स्थानीय शासन मंत्री हरजोत सिंह बैंस भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

म्यूनिसिपल मुलाज़म सफ़ाई कर्मचारी यूनियन के वरिष्ठ नेता कुलदीप सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि वे इस शर्त पर अपनी हड़ताल वापस ले रहे हैं कि राज्य सरकार उनकी स्वीकृत मांगों को धरातल पर लागू करने के लिए 30 दिनों की सख्त समय सीमा (डेडलाइन) का पालन करेगी। यदि तय समय के भीतर इन फैसलों को अमल में नहीं लाया गया, तो सभी सफाई कर्मचारी और सीवरमैन फिर से बेमियादी हड़ताल शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। दूसरी ओर, वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने यूनियन के प्रतिनिधियों को पूरी तरह आश्वस्त किया कि राज्य में आगामी निकाय चुनाव (Municipal Elections) समाप्त होते ही आने वाले दिनों में उनकी सभी जायज मांगों को विधिवत पूरा कर दिया जाएगा।

आउटसोर्स से अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) प्रणाली में बदलाव: जोखिम भरे और खतरनाक कार्यों की श्रेणी में आने वाले सभी कर्मचारियों—जिसमें सफाई सेवक, सीवरमैन, फायरमैन, ड्राइवर, माली, बेलदार, रखरखाव स्टाफ, पंप ऑपरेटर और ट्यूबवेल ऑपरेटर शामिल हैं—को तीन साल की संतोषजनक आउटसोर्स सेवा पूरी करने के बाद सीधे संविदा (अनुबंध) के आधार पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

स्थानीय शासन मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जो तीन साल की सेवा पूरी करने वाले अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग की कानूनी और प्रशासनिक समीक्षा करेगी। इस समिति में स्थानीय शासन के निदेशक, वित्त विभाग के वरिष्ठ प्रतिनिधि और म्यूनिसिपल कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। समिति को 30 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।