सारे लंबित कामों को जल्द से जल्द पूरा करें सभी मंत्री
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी के प्रगति मैदान स्थित अत्याधुनिक कनवेंशन सेंटर ‘भारत मंडपम’ में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक बेहद महत्वपूर्ण और मैराथन बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने पूरी मंत्रिपरिषद को सुशासन (गुड गवर्नेंस) की रफ्तार को दोगुना करने का कड़ा संदेश दिया।
उन्होंने मंत्रियों को दो टूक लहजे में हिदायत दी कि जनता से जुड़े जितने भी नीतिगत फैसले और सरकारी कार्य मंत्रालयों में लंबित पड़े हैं, उन्हें युद्धस्तर पर तुरंत निपटाया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने मंत्रियों को मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर किसी भी तरह के अनावश्यक और निरर्थक विवादों में शामिल होने से बचने की सख्त चेतावनी दी।
तय समय सारिणी के अनुसार, शाम करीब 5 बजे शुरू हुई यह समीक्षा बैठक रात साढ़े नौ बजे तक यानी लगभग साढ़े चार घंटे तक अनवरत चलती रही। इस सघन मंथन का मुख्य एजेंडा देश के प्रशासनिक ढांचे में बड़े सुधार करना, नौकरशाही की कार्यकुशलता को पारदर्शी व जवाबदेह बनाना और केंद्र सरकार के सबसे महत्वाकांक्षी दीर्घकालिक विज़न विकसित भारत 2047 के रोडमैप को गति देना था।
मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा शुरू होने से ठीक पहले, बैठक कक्ष में एक बेहद आत्मीय दृश्य भी देखने को मिला। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में पांच देशों की अत्यंत सफल और ऐतिहासिक विदेश यात्रा संपन्न कर स्वदेश लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सभी केंद्रीय मंत्रियों ने खड़े होकर ज़ोरदार तालियों की गड़गड़ाहट के साथ भव्य स्वागत किया। इसके बाद शुरू हुए प्रेजेंटेशन और कामकाज के मूल्यांकन के दौरान उन मंत्रालयों और मंत्रियों के प्रदर्शन को विशेष रूप से सराहा गया, जिन्होंने डिजिटल गवर्नेंस का उपयोग करते हुए अपने विभागों की फाइलों और जन-शिकायतों का निपटारा सबसे तेज़ गति से किया था।
पूरी मंत्रिपरिषद को सीधे संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि अब समय अतीत की सफलताओं का जश्न मनाने या पुरानी उपलब्धियों की जुगाली करने का नहीं है, बल्कि पूरी ऊर्जा के साथ भविष्य की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने का है।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2026 की मौजूदा समयसीमा को रेखांकित करते हुए मंत्रियों से कहा, हमारी सरकार साल 2014 से लगातार देश की सेवा में है और जनता ने हम पर भरोसा जताया है, लेकिन अब 2026 आ चुका है। हमें इस नए दौर की आवश्यकताओं के अनुरूप यह देखना होगा कि हम आने वाले समय में देश के नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने के लिए और क्या नया व बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि यह समय देश को आगे की ओर देखने का है, पुरानी बातों को रीवाइंड (rewind) करने का नहीं। उन्होंने सभी मंत्रियों को कड़े निर्देश दिए कि वे अपने-अपने विभागों के वार्षिक लक्ष्यों को तय समय सीमा के भीतर हर हाल में पूरा करें, ताकि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प केवल कागजों पर न रहकर धरातल पर पूरी तरह साकार हो सके।