पेंशन फंड ने नयी योजना लागू करने की जानकारी दी
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दो विकल्पों में से एक चुनना होगा
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बेहतर आर्थिक लाभ देने की योजना
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अपने फंड का बेहतर उपयोग करेंगे
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत रिटायरमेंट इनकम स्कीम्स और नए ड्राडाउन (निकासी) विकल्प पेश किए हैं। इस कदम का उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद अंशधारकों के लिए नियमित नकदी प्रवाह को अधिक सुगम बनाना और उनके पेंशन फंड की लंबी अवधि तक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पीएफआरडीए द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, आरआईएस एक नई लाइफसाइकिल योजना होगी, जिसमें निवेश को धीरे-धीरे सुरक्षित फंडों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था है। इसके तहत, 60 वर्ष की आयु में इक्विटी (शेयर बाजार) में अंशधारक का निवेश 35 प्रतिशत होगा, जो 75 वर्ष की आयु तक सालाना घटते हुए न्यूनतम 10 प्रतिशत पर आ जाएगा। इसके बाद 85 वर्ष की आयु तक यह इसी स्तर पर बना रहेगा।
नए ड्राडाउन विकल्पों के माध्यम से, सेवानिवृत्त लोग अपने एकमुश्त कॉर्पस से मासिक, त्रैमासिक या वार्षिक आधार पर आवधिक भुगतान प्राप्त कर सकेंगे। यह निकासी अनिवार्य एनपीएस वार्षिकी (अन्यूटी) भुगतान के साथ-साथ की जा सकती है। नियामक का कहना है कि जहां एक तरफ ड्राडाउन विकल्पों से पेंशनभोगियों की नियमित आय बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ इक्विटी ग्लाइड पाथ के कारण उनके शेष फंड को बाजार की वृद्धि का लाभ भी मिलता रहेगा। हालांकि, पीएफआरडीए ने स्पष्ट किया है कि इन नई योजनाओं के तहत किसी निश्चित भुगतान की कोई गारंटी नहीं होगी और यह पूरी तरह बाजार जोखिमों के अधीन है।
अब तक, एनपीएस अंशधारक सेवानिवृत्ति पर कुल फंड का अधिकतम 60 प्रतिशत हिस्सा टैक्स-फ्री एकमुश्त निकाल सकते थे और कम से कम 40 प्रतिशत हिस्से का उपयोग लाइफ-लॉन्ग पेंशन (अन्यूटी) खरीदने के लिए करना अनिवार्य था। नए नियमों के बाद, अब सेवानिवृत्त लोग अपनी 60 प्रतिशत एकमुश्त राशि को एक बार में निकालने के बजाय एनपीएस में ही निवेशित रखकर सिस्टमैटिक विड्रॉल की तरह समय-समय पर निकाल सकते हैं।
अब अंशधारक निम्नलिखित दो तकनीकों में से किसी एक को चुन सकते हैं। सिस्टमैटिक पेआउट रेट डिफॉल्ट विकल्प है, जिसमें हर साल अंशधारक की वर्तमान आयु और निकासी की अवधि के आधार पर भुगतान की दर तय होती है।
सिस्टमैटिक यूनिट रिडेम्पशन में हर महीने या तिमाही में फंड की निश्चित यूनिट बेची जाती हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी के पास 80 लाख रुपये का फंड (8 लाख यूनिट) है और वह 25 वर्षों तक मासिक भुगतान चाहता है, तो हर महीने उसके खाते से ठीक 2,666.67 यूनिट भुनाई जाएंगी, और तत्कालीन एनएवी (NAV) के आधार पर पैसा खाते में आ जाएगा। अंशधारकों को हर दो वित्तीय वर्षों में एक बार अपना पेंशन फंड मैनेजर बदलने की छूट भी होगी। यह व्यवस्था 85 वर्ष की आयु तक लागू रहेगी।