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रांची समाहरणालय के लोगों पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा

छत पर मधुमक्खी के छत्ते पर किसी का ध्यान नहीं

  • छत के अंदरूनी पूर्वी छोर पर है यह

  • अधिक रंगीन कपड़ों से उत्तेजित होते हैं

  • इनका हमला अत्यंत घातक भी होता है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड की राजधानी रांची का समाहरणालय (कलेक्टर ऑफिस) इन दिनों एक अनजाने और बेहद संवेदनशील खतरे के साए में है। समाहरणालय के खंड दो (ब्लॉक-2) के पूरे परिसर में किसी भी दिन भारी अफरातफरी और भगदड़ मच सकती है। इस संभावित खतरे का मुख्य कारण भवन की छत के पूर्वी छोर पर लगा मधुमक्खियों का एक विशाल छत्ता है, जो समय के साथ दिनोंदिन बड़ा और सघन होता जा रहा है।
आश्चर्य और चिंता की बात यह है कि इस गंभीर समस्या की ओर संबंधित अधिकारियों और प्रशासनिक अमले का ध्यान अब तक नहीं गया है। समाहरणालय का यह खंड बेहद व्यस्त इलाका है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक अपने सरकारी कार्यों के लिए आते हैं, साथ ही दर्जनों सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी वहां निरंतर कार्यरत रहते हैं। उस तल्ले और उसके आसपास के गलियारों में लोगों का आना-जाना लगातार बना रहता है।
स्थानीय स्तर पर और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, कई बार चमकीले या अधिक रंगीन कपड़े पहनकर वहां से गुजरने वाले लोगों को देखकर छत्ते पर मौजूद मधुमक्खियां उत्तेजित हो जाती हैं और हवा में चक्कर काटने लगती हैं। जीव विज्ञान और विशेषज्ञों के अनुसार, मधुमक्खियां तेज और भड़कीले रंगों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती हैं और इसे अपने लिए एक खतरे के रूप में देखती हैं।

यह राहत और अच्छी बात जरूर है कि अब तक इन मधुमक्खियों ने परिसर में किसी भी व्यक्ति पर सीधा हमला नहीं किया है। लेकिन इस वर्तमान शांति को सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता। इस बात की कोई जिम्मेदारी या गारंटी नहीं है कि आने वाले दिनों में छत्ते पर मौजूद ये हजारों मधुमक्खियां अचानक किसी राहगीर पर या पूरे समाहरणालय परिसर में मौजूद भीड़ पर धावा नहीं बोलेंगी।

कीट विशेषज्ञों और पूर्व के अनुभवों पर गौर करें तो एक बार यदि मधुमक्खियां अपने छत्ते से आक्रामक होकर निकल जाएं, तो वे सामूहिक रूप से अत्यंत घातक हमला करती हैं। उनके डंक में मौजूद जहर (वेनम) इंसानी शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह होता है, जिससे शरीर में तेज जलन, सूजन और सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।

विगत वर्षों में रांची और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों से ऐसी कई दुखद खबरें सामने आ चुकी हैं, जहां मधुमक्खियों के अचानक किए गए हमले और अत्यधिक काटने के कारण कई लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है।

वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह कहना बिल्कुल अतिशयोक्ति नहीं होगा कि रांची समाहरणालय का खंड दो इस वक्त एक तरह के ‘टाइम बम’ के ऊपर बैठा हुआ है, जो कभी भी फट सकता है। यदि समय रहते वन विभाग या किसी विशेषज्ञ टीम की मदद से इस छत्ते को सुरक्षित रूप से वहां से नहीं हटाया गया, तो किसी भी दिन यहां एक बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है, जिससे परिसर में भगदड़ और जनहानि की स्थिति बन सकती है। जिला प्रशासन को इस ओर तुरंत संज्ञान लेते हुए जनहित में उचित कदम उठाने की सख्त आवश्यकता है।