Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Ahmedabad-Dholera Rail: अहमदाबाद से धोलेरा अब सिर्फ 45 मिनट में, भारत की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड... Namo Bharat FOB: निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन और सराय काले खां नमो भारत स्टेशन के बीच फुटओवर ब्रिज शुरू Sant Kabir Nagar News: मदरसा बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, डीएम और कमिश्नर का आदेश रद्द Patna News: बालगृह के बच्चों के लिए बिहार सरकार की बड़ी पहल, 14 ट्रेड में मिलेगी फ्री ट्रेनिंग और नौ... Mumbai Murder: मुंबई के आरे में सनसनीखेज हत्या, पत्नी के सामने प्रेमी का गला रेता; आरोपी गिरफ्तार Supreme Court News: फ्यूल संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, वर्चुअल सुनवाई और वर्क फ्रॉम होम ... Hoshiarpur Borewell Rescue: होशियारपुर में 250 फीट गहरे बोरवेल में गिरा 3 साल का मासूम, रेस्क्यू ऑपर... Latehar News: लातेहार में आसमानी बिजली का कहर, वज्रपात से दो की मौत, एक महिला गंभीर रूप से घायल Jamtara News: आदिवासी संस्कृति की पहचान हैं ये पारंपरिक वाद्य यंत्र, सरकार दे रही है मुफ्त नगाड़ा और... Deoghar Petrol Crisis: देवघर में गहराया ईंधन संकट, पंपों पर लटके 'नो स्टॉक' के बोर्ड; ₹300 तक पहुंचा...

पेट्रोल और डीजल के दाम तीन रुपया बढ़े

पहले से ही बनाया जा रहा था इसके लिए माहौल

  • बढ़ी हुई कीमतें तुरंत से प्रभावी

  • ईरान युद्ध का हवाला दिया गया है

  • तेल कंपनियों को हो रहा है काफी घाटा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः ईरान में जारी युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के कारण हफ़्तों से लगाए जा रहे कयासों पर विराम लगाते हुए, केंद्र सरकार ने अंततः देश के चार प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। यह वृद्धि ₹3 प्रति लीटर की दर से लागू की गई है। उल्लेखनीय है कि खुदरा उपभोक्ताओं के लिए पिछले चार वर्षों में यह कीमतों में होने वाला पहला बड़ा इजाफा है। यह नई दरें शुक्रवार, 15 मई से प्रभावी हो गई हैं।

खुदरा कीमतों में इस उछाल से पहले, मार्च के महीने में ही प्रीमियम पेट्रोल के दामों में वृद्धि देखी गई थी। देश की तीन दिग्गज तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने प्रीमियम ईंधन की श्रेणियों में पहले ही दरें बढ़ा दी थीं।

हालांकि प्रीमियम कीमतों में वृद्धि के बावजूद, ये सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां प्रतिदिन लगभग 16,000 करोड़ रुपये का भारी घाटा झेल रही थीं। इसका मुख्य कारण यह था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल की खरीद ऊंची कीमतों पर हो रही थी, लेकिन इसका बोझ सीधे खुदरा उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा रहा था। तेल कंपनियों ने इस गंभीर वित्तीय स्थिति के संदर्भ में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी। रिपोर्टों के अनुसार, मोदी सरकार अब तक मुद्रास्फीति (महंगाई) को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से ईंधन की कीमतों को स्थिर रखे हुए थी, क्योंकि ईंधन के दाम बढ़ने का सीधा असर दैनिक उपयोग की हर वस्तु की लागत पर पड़ता है।

28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने से पहले भारत की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति काफी सुदृढ़ थी। युद्ध के प्रारंभ होते ही वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिसे शुरुआत में इन कंपनियों ने स्वयं वहन करने की कोशिश की। लेकिन कुछ ही हफ्तों में यह स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गईं।

आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने से पहले फरवरी में भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल के बास्केट की औसत कीमत 69 डॉलर प्रति बैरल थी। युद्ध के बाद के महीनों में यह तेजी से बढ़कर 113-114 डॉलर प्रति बैरल के औसत स्तर पर पहुंच गई। इसी दबाव को देखते हुए, भारत के वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया सहित कई शीर्ष अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया था कि अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बाजार के अनुरूप बढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए।