अगले 18 तक चुप रहेंगे राधाकृष्ण किशोर
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प्रभारी के राजू भी लपेटे में आये
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धीरज साहू खुद मिलने आये थे
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पार्टी अनुशासन का ध्यान है मुझे
राष्ट्रीय खबर
रांचीः झारखंड की राजनीति में सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर संगठनात्मक खींचतान और असंतोष के स्वर तेज होते दिखाई दे रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के हालिया रुख ने कांग्रेस आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार शाम इस गतिरोध को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहल हुई, जब कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद धीरज साहू तथा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने रांची के अशोक नगर स्थित किशोर के आवास पर उनसे लंबी मुलाकात की।
लगभग एक घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में पार्टी की वर्तमान संगठनात्मक स्थिति, आगामी चुनावी चुनौतियों और विशेष रूप से दलित व वंचित समाज की पार्टी के भीतर उपेक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर गहन मंथन हुआ। बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का रुख कुछ नरम जरूर पड़ा, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनके द्वारा उठाए गए सवाल न तो व्यक्तिगत हैं और न ही अर्थहीन। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि वे पार्टी के कुछ हालिया फैसलों से काफी मर्माहत हैं, क्योंकि ये मुद्दे सामाजिक न्याय, दलित अस्मिता और कार्यकर्ताओं के सम्मान से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।
मंत्री किशोर ने एक परिपक्व राजनेता की तरह पार्टी अनुशासन का हवाला देते हुए कहा कि वे संगठन की एकता को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने घोषणा की कि धीरज साहू और डॉ. इरफान अंसारी के विशेष अनुरोध पर वे 18 मई तक किसी भी प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणी या बयानबाजी से परहेज करेंगे।
इस अवधि के दौरान वे झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू से व्यक्तिगत मुलाकात कर अपना पक्ष और समाज की शिकायतों को विस्तार से साझा करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और संगठन की मजबूती तभी संभव है जब इन वर्गों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में उचित सम्मान और भागीदारी मिले।
वहीं, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे धीरज साहू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उन मतभेदों का सार्वजनिक प्रदर्शन विपक्षी दल, विशेषकर भाजपा को हमलावर होने का अवसर दे देता है। उन्होंने संगठनात्मक मंच पर संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने राधाकृष्ण किशोर को एक अभिभावक और संघर्षशील व्यक्तित्व बताते हुए भरोसा दिलाया कि कांग्रेस नेतृत्व उनकी भावनाओं और सुझावों के प्रति गंभीर है। अंततः, झारखंड कांग्रेस में फिलहाल 18 मई तक एक युद्धविराम जैसी स्थिति बनी हुई है।