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कामजोंग सीमा के पास आतंकवादियों का अचानक हमला से दहशत

गांवों में आग लगायी, एक महिला घायल

  • म्यांमार से आये थे सभी हमलावर

  • सुबह चार बजे अचानक ही हुआ हमला

  • जान बचाने लोग जंगलों में भागे

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: मणिपुर के कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास गुरुवार की सुबह भारी हथियारों से लैस संदिग्ध उग्रवादियों ने कई गांवों पर भीषण हमला किया। यह घटना सुबह करीब 4 बजे की है, जब अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज एक किलोमीटर दूर स्थित तांगखुल नागा समुदाय के गांवों—नामली, वांगली और चोरो—को निशाना बनाया गया।

उग्रवादियों ने अचानक गांवों में घुसकर अंधाधुंध आगजनी की, जिसमें कई घर जलकर राख हो गए। चोरो गांव में एक चर्च को छोड़कर लगभग सभी घरों को नुकसान पहुँचा है। हमले के दौरान मची अफरा-तफरी में एक बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए घने जंगलों की ओर भागने को मजबूर हुए। घटना की सूचना मिलते ही असम राइफल्स और स्थानीय पुलिस ने मोर्चा संभाला और इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। म्यांमार सीमा से सटे होने के कारण यह क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

इसी बीच, सुरक्षा बलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। असम पुलिस और असम राइफल्स ने सिलचर में एक संयुक्त अभियान चलाकर पति-पत्नी (लैशराम टिकेन मेईतेई और मोनालिशा चानू) को गिरफ्तार किया है। उनके पास से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए हैं। मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए पकड़े गए ये आरोपी चूड़ाचंदपुर के निवासी हैं और एक किराए के मकान में छिपकर अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।

दूसरी ओर, असम के राजनीतिक गलियारों में 2026 के विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार राज्य में वोटिंग पैटर्न में गहरा ध्रुवीकरण देखने को मिल रहा है। कांग्रेस जहाँ मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, वहीं भाजपा नीत गठबंधन आदिवासी क्षेत्रों और चाय बागान श्रमिक समुदायों में बढ़त बना रहा है।

राजनीति में यह बड़ा बदलाव ऑल-इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के घटते प्रभाव के कारण आया है। पहले अल्पसंख्यक वोट कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच बँट जाते थे, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिलता था। लेकिन अब एआईयूडीएफ की कमजोर होती भूमिका ने चुनावी समीकरणों को नया और प्रतिस्पर्धी रूप दे दिया है। पूर्वोत्तर में सुरक्षा चुनौतियां और बदलती राजनीति आने वाले समय में राज्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।