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चाहें तो राष्ट्रपति शासन लगा दें: ममता बनर्जी

अपनी बात पर अब भी अड़ी हुई है तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो

  • चुनाव ही पूरी तरह चुराया गया है

  • नैतिक तौर पर हमारी ही जीत हुई

  • चुनाव आयोग पूरी तरह पक्षपाती

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने पद से हटने से मना कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने इसे एक सांकेतिक विरोध करार दिया है। ममता बनर्जी ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा है कि केंद्र चाहे तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दे या उन्हें बर्खास्त कर दे, लेकिन वे स्वयं पद नहीं छोड़ेंगी।

बुधवार, 6 मई को कालीघाट स्थित अपने आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, यदि वे चाहें तो राष्ट्रपति शासन लगा दें, या मुझे बर्खास्त कर दें। इसे इतिहास में एक काले दिन के रूप में दर्ज होने दें।

इससे पूर्व, 5 मई को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनाव का खलनायक बताते हुए ईवीएम पर भी सवाल उठाए। ममता बनर्जी का दावा है कि उनकी हार आधिकारिक तौर पर हुई है, लेकिन नैतिक रूप से जीत उनकी पार्टी की हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राजभवन जाकर इस्तीफ़ा नहीं सौंपेंगी।

टीएमसी नेता और बेलीघाटा से विधायक कुणाल घोष ने इसे असहमति व्यक्त करने का एक लोकतांत्रिक तरीका बताया है। घोष के अनुसार, इस्तीफ़ा न देना उन 100 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में कथित हेरफेर के खिलाफ एक विरोध है, जहाँ चुनाव आयोग ने परिणामों को प्रभावित किया। पार्टी अब मतगणना में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की तैयारी कर रही है।

भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुसार, विधानसभा चुनाव में बहुमत खोने के बाद मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर राज्यपाल को अपना इस्तीफ़ा सौंप देना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत, मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री राज्यपाल की इच्छा तक पद पर बने रहते हैं। यदि कोई मुख्यमंत्री स्वेच्छा से पद नहीं छोड़ता, तो राज्यपाल के पास हस्तक्षेप करने की शक्ति होती है। वे बहुमत प्राप्त दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं या सदन के पटल पर फ्लोर टेस्ट का आदेश दे सकते हैं। पश्चिम बंगाल की वर्तमान स्थिति में, जहाँ हिंसा की खबरें आ रही हैं और मुख्यमंत्री इस्तीफ़ा देने को तैयार नहीं हैं, राज्यपाल की भूमिका और संवैधानिक प्रावधान अत्यंत महत्वपूर्ण हो गए हैं