इन तमाम परियोजनाओं को पीएम मोदी ने सराहा
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी है मंजूरी
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उन्नीस जिलों तक विस्तार होगा
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गति शक्ति योजना का हिस्सा है
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा छह राज्यों में फैली प्रमुख रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से कनेक्टिविटी मजबूत होगी, परिचालन दक्षता में सुधार होगा और पूरे देश में आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने इन विस्तार परियोजनाओं को भारत के बुनियादी ढांचा नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि स्वीकृत कार्यों से परिवहन की दक्षता बढ़ेगी और महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी। ये परियोजनाएं मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों को कवर करेंगी।
23,437 करोड़ रुपये की तीन बड़ी परियोजनाएं प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने कुल 23,437 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली तीन प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को हरी झंडी दी है। इन परियोजनाओं में शामिल हैं। नागदा-मथुरा: तीसरी और चौथी रेलवे लाइन। गुंतकल-वाड़ी: तीसरी और चौथी रेलवे लाइन। बुढ़वल-सीतापुर: तीसरी और चौथी रेलवे लाइन।
सरकार के अनुसार, ये परियोजनाएं लाइन क्षमता में काफी सुधार करेंगी, भीड़भाड़ कम करेंगी और भारतीय रेलवे की दक्षता बढ़ाएंगी। पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर का विस्तार होगा, जिससे यात्री और माल ढुलाई दोनों सुगम हो जाएगी।
सामाजिक और आर्थिक लाभ केंद्र सरकार ने बताया कि इस विस्तार से लगभग 4,161 गांवों को सीधा लाभ होगा, जिनकी कुल आबादी करीब 83 लाख है। इसके अतिरिक्त, महाकालेश्वर मंदिर, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, कूनो नेशनल पार्क, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी।
माल ढुलाई और पर्यावरणीय लाभ उन्नत बुनियादी ढांचे से कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, पेट्रोलियम, उर्वरक और लोहे जैसे सामानों की ढुलाई मजबूत होगी, जिससे वार्षिक माल ढुलाई क्षमता में लगभग 60 मिलियन टन की वृद्धि होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस विस्तार से तेल आयात में लगभग 37 करोड़ लीटर की कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन में महत्वपूर्ण गिरावट होगी, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा।