विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी हुआ औपचारिक कार्यक्रम
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में आती सुगमता और सीमाई स्थिरता के बीच, विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2026 के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा की घोषणा कर दी है। लगातार दूसरे वर्ष आयोजित होने वाली यह प्रतिष्ठित यात्रा जून से अगस्त 2026 के मध्य संपन्न होगी। गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में सैन्य वापसी की प्रक्रिया पूर्ण होने और कूटनीतिक स्तर पर सुधार के संकेतों के बाद, चीनी सरकार के समन्वय से पिछले वर्ष इस यात्रा को पुनः आरंभ किया गया था।
इस वर्ष की यात्रा के लिए मंत्रालय ने दो पारंपरिक मार्गों का चयन किया है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा हो सके। उत्तराखंड मार्ग (लिपुलेख दर्रा) मार्ग से कुल 10 जत्थे रवाना किए जाएंगे। प्रत्येक जत्थे में 50 यात्री शामिल होंगे। यह मार्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, 10 अन्य जत्थे सिक्किम के नाथू ला दर्रे से होकर तिब्बत (चीन) में प्रवेश करेंगे। इसमें भी प्रति जत्था 50 तीर्थयात्रियों की संख्या निर्धारित की गई है। इस प्रकार, इस वर्ष कुल 1,000 श्रद्धालुओं को भगवान शिव के पावन धाम के दर्शन करने का अवसर प्राप्त होगा।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि तीर्थयात्रियों का चयन पूरी तरह से पारदर्शी और आधुनिक प्रणाली पर आधारित होगा। प्राप्त आवेदनों में से यात्रियों को चुनने के लिए एक कंप्यूटर जनित रैंडम सिलेक्शन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मंत्रालय ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि चयन प्रक्रिया लिंग-संतुलित होगी, ताकि पुरुष और महिला आवेदकों को समान प्रतिनिधित्व मिल सके।
इच्छुक श्रद्धालु आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं और आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्रीय शांति और पड़ोसी देशों के बीच सहयोग की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्वास्थ्य मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, विदेश मंत्रालय ने सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली हैं।